उडुपी (कर्नाटक) , अगस्त 04 -- कर्नाटक के उडुपी में यक्षगान के महान गुरु, प्रख्यात मड्डले वादक और प्रसिद्ध गणेश प्रतिमा शिल्पकार कृष्णस्वामी जोइस का मंगलवार तड़के संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 75 वर्ष के थे।
श्री जोइस के परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं।
उडुपी जिले के ब्रह्मावर के निकट चंतारू गांव की मातापाडी रोड स्थित 'यक्ष सौरभ' निवासी कृष्णस्वामी जोइस ने आज तड़के अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ यक्षगान की एक गौरवशाली परंपरा के एक युग का अंत हो गया। उनके निधन पर कलाकारों और सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों ने इस पारंपरिक तटीय लोककला के सबसे सम्मानित हस्ताक्षरों में से एक को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
यक्षगान ज्ञान के भंडार माने जाने वाले श्री जोइस ने यक्षगान प्रस्तुतियों के प्रमुख वाद्य यंत्र 'मद्दल' पर महारत के लिए अपार प्रसिद्धि हासिल की। एक गुरु के रूप में उन्होंने कई पीढ़ियों के कलाकारों को प्रशिक्षित किया और इस शास्त्रीय रंगमंच शैली की समृद्ध परंपराओं तथा बारीकियों को सहेज कर रखा।
श्री जोइस महान यक्षगान कलाकार कालिंगा नवाडा के करीबी सहयोगी थे और यक्षगान के संगीत, लय तथा अभिनय प्रस्तुति पर उनकी गहरी पकड़ के लिए व्यापक रूप से सम्मानित थे। उन्होंने अनगिनत यक्षगान प्रस्तुतियों में मड्डले वादन के साथ-साथ प्रशिक्षण शिविरों और कार्यशालाओं का संचालन भी किया तथा युवा प्रतिभाओं को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यक्षगान में अपने योगदान के अलावा श्री जोइस पारंपरिक गणेश मूर्तियों के कुशल मूर्तिकार भी थे। उन्होंने कलात्मक शिल्प कौशल और सांस्कृतिक विरासत के अद्भुत संगम के लिए खूब सराहना बटोरी। प्रदर्शनमूलक कलाकार और शिल्पकार के रूप में उनकी इस दोहरी विरासत ने उन्हें कर्नाटक के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक बेहद सम्मानित हस्ती बना दिया।
यक्षगान में उनके उत्कृष्ट योगदान और कर्नाटक की पारंपरिक कलाओं के संरक्षण के लिए विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों की ओर से उन्हें वर्षों से सम्मानित किया जाता रहा है।
श्री जाेइस के पार्थिव शरीर को चंतारू स्थित उनके निवास 'यक्ष सौरभ' में रखा गया है, ताकि उनके प्रशंसक, शिष्य और यक्षगान समुदाय के सदस्य उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सकें। कलाकारों और सांस्कृतिक संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके निधन को कर्नाटक की लोक और नाट्य परंपराओं के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
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