म्यूनिख , फरवरी 14 -- अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में चीन और यूरोप के संबंधों के प्रति 'सतर्क सहयोग' और 'रणनीतिक यथार्थवाद' का दृष्टिकोण साझा किया।
श्री रुबियो ने प्रमुख शक्तियों के बीच अवसरों और तनावों दोनों को स्वीकार करते हुए शनिवार को इस बात पर जोर दिया, "दुनिया के प्रति हमारा यह उत्तरदायित्व है कि हम इन परस्पर विरोधी राष्ट्रीय हितों को यथासंभव बेहतर ढंग से प्रबंधित करने का प्रयास करें और आर्थिक एवं उससे भी बदतर दोनों स्थितियों में संघर्षों से बचें।"दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रूप में अमेरिका और चीन वैश्विक जिम्मेदारियां साझा करते हैं। श्री रुबियो ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक प्रभाव पैदा करने के लिए उन क्षेत्रों में संवाद बनाये रखने पर जोर दिया, जहाँ उनके हित समान हैं।
श्री रुबियो ने हालांकि कहा कि अमेरिका-चीन के बीच मौलिक मतभेद बने रहने की संभावना है। उन्होंने आगे कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रूप में अमेरिका-चीन राष्ट्रीय हितों के आधार पर संबंध बनाये रखने का इरादा रखते हैं। श्री रुबियो के अनुसार, कूटनीति का कार्य हितों के टकराव का प्रबंधन करना और जहां भी संभव हो अनावश्यक टकराव से बचना है।
श्री रुबियो ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि रणनीतिक प्रतिस्पर्धा अपरिहार्य बनी हुई है। उन्होंने कहा, " यह देखते हुए कि कोई भी किसी भ्रम में नहीं है। हमारे देश और पश्चिम एवं चीन के बीच कुछ ऐसी मौलिक चुनौतियां हैं, जो निकट भविष्य में जारी रहेंगी।"उनके विचार इस व्यापक स्वीकृति को दर्शाते हैं कि जहां एक ओर सहयोग आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर गहरे राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी मतभेद बने रहेंगे।
यूरोप की ओर रुख करते हुए श्री रुबियो ने 'ट्रांसअटलांटिक' साझेदारी को लेकर अमेरिका की प्रतिबद्धता को दोहराया और घोषणा की, 'हम एक साथ हैं'। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संयुक्त राज्य अमेरिका अपने यूरोपीय भागीदारों के साथ गठबंधन को कमजोर नहीं, बल्कि सुरक्षित करना चाहता है, भले ही वह उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए अधिक जिम्मेदारी लेने का आग्रह कर रहा हो।
तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में श्री रुबियो के संदेश ने कूटनीति, गठबंधन की एकता और रणनीतिक संतुलन को वैश्विक स्थिरता के आवश्यक स्तंभों के रूप में उल्लेख किया।
म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री रुबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका यूरोपीय देशों के साथ अपने गठबंधन को फिर से जिंदा करना चाहता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका अपनी ट्रांसअटलांटिक साझेदारी को समाप्त नहीं, बल्कि संरक्षित करना चाहता है।
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