नयी दिल्ली , जनवरी 15 -- देश में मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिये चार महानगरों में 200 स्वचालित मौसम स्टेशन (एडब्ल्यूएस) स्थापित किये जायेंगे। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के 151वें स्थापना दिवस के अवसर पर यह घोषणा की।

श्री सिंह ने कहा कि वर्ष 2026 में देश के चार प्रमुख महानगरों-दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और पुणे-में कुल 200 (एडब्ल्यूएस ) स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक महानगर में 50-50 मौसम स्टेशन लगाए जाएंगे, जिससे शहरी क्षेत्रों में अत्यंत स्थानीय और वास्तविक समय पर आधारित मौसम पूर्वानुमान संभव हो सकेगा। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, मौसम विशेषज्ञ और अन्य हितधारक उपस्थित रहे। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने आईएमडी परिसर में मॉडल ऑब्जर्वेटरी, 3डी-प्रिंटेड स्वचालित मौसम स्टेशन और स्वचालित एग्रो मौसम स्टेशन का उद्घाटन भी किया।

समापन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार देशभर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और नए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि जैसे-जैसे आईएमडी अपने 152वें वर्ष में प्रवेश करेगा, उसकी सटीकता, विश्वसनीयता और जनविश्वास और भी मजबूत होगा।

श्री सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि कहा कि बढ़ती शहरी आबादी और जलवायु परिवर्तन के दौर में हाइपर-लोकल वेदर फोरकास्टिंग की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि स्वचालित मौसम स्टेशनों का सघन नेटवर्क तापमान, वर्षा, आर्द्रता, वायुदाब और हवाओं से जुड़ा अत्यंत सूक्ष्म और उच्च स्तरीय आंकड़ा उपलब्ध कराएगा। इससे अचानक होने वाली तेज बारिश, आंधी-तूफान, लू और अत्यधिक गर्मी जैसी घटनाओं की सटीक और समय पर भविष्यवाणी संभव होगी। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल आपदा प्रबंधन के लिए अहम है, बल्कि कृषि, विमानन, शहरी नियोजन और जन सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करेगी।

श्री सिंह ने कहा कि सरकार आंकड़ा आधारित और शहर-विशेष मौसम पूर्वानुमान को प्राथमिकता दे रही है, ताकि आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और शहरी बुनियादी ढांचे की बेहतर योजना बनाई जा सके।

केंद्रीय मंत्री ने आईएमडी के 151 वर्षों के सफर को याद करते हुए मंत्री ने कहा कि यह संस्था भारत के प्रशासनिक और ऐतिहासिक विकास के साथ-साथ आगे बढ़ी है। पूर्वोत्तर भारत से शुरू होकर कोलकाता, शिमला, पुणे और अंततः नई दिल्ली तक आईएमडी ने समय-समय पर खुद को बदली हुई जरूरतों के अनुरूप ढाला है।

उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में 40 से 50 प्रतिशत तक सुधार हुआ है। चक्रवातों की दिशा (साइक्लोन ट्रैक) की भविष्यवाणी में 35 से 40 प्रतिशत तक सुधार दर्ज किया गया है। वहीं, मासिक और मौसमी पूर्वानुमानों में त्रुटि पहले जहां लगभग 7.5 प्रतिशत थी, वह अब घटकर करीब 2.5 प्रतिशत रह गई है। मंत्री ने इन उपलब्धियों का श्रेय तकनीकी निवेश, संस्थागत सहयोग और वैज्ञानिकों को मिली स्वतंत्रता को दिया।

श्री सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई 'मिशन मौसम' पहल का उल्लेख करते हुये कहा कि यह मिशन उन्नत मौसम विज्ञान और जलवायु सेवाओं के प्रति सरकार की गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री इस तरह की पहलों की घोषणा राष्ट्रीय मंचों से करते हैं, तो इससे वैज्ञानिक संस्थानों का मनोबल बढ़ता है और कार्य की गति भी तेज होती है।

श्री सिंह ने बताया कि भारत अब क्षेत्रीय स्तर पर भी मौसम सेवाओं में नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है। भारत बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों को आपदा से जुड़ी मौसम जानकारी और उपग्रह आधारित सहायता प्रदान कर रहा है, जिससे दक्षिण एशिया में सहयोग और विश्वास मजबूत हुआ है।

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