ऋषिकेश , मई 03 -- उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित तीन दिवसीय मौन रिट्रीट का रविवार को आध्यात्मिक वातावरण में समापन हो गया।

गंगा तट पर आयोजित इस रिट्रीट में देश-विदेश से आए साधकों ने मौन साधना के माध्यम से आत्मिक शांति और आंतरिक संवाद का अनुभव किया। रिट्रीट के दौरान साधकों ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती के सान्निध्य में मौन के महत्व को समझते हुए अपने भीतर के विचारों को शांत करने का अभ्यास किया। मां गंगा की पवित्र धारा और हिमालय की शांत वादियों के बीच यह आयोजन ज्ञान, ध्यान और सेवा के संगम का प्रतीक बना।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि मौन केवल शब्दों का अभाव नहीं, बल्कि चेतना की प्रखर अवस्था है। उन्होंने युवाओं को प्रतिदिन कुछ समय मौन के लिए निकालने की प्रेरणा देते हुए कहा कि मौन के माध्यम से मन की अशांति दूर होती है और जीवन को नई दिशा मिलती है।

उन्होंने कहा कि उपनिषदों का ज्ञान मौन की गहराइयों से ही प्रकट हुआ है और यही मौन जीव को शिव तथा व्यक्ति को विराट से जोड़ने का कार्य करता है। रिट्रीट में प्रतिभागियों ने योग, ध्यान, मंत्र उच्चारण एवं मौन साधना के विभिन्न सत्रों में भाग लिया। योगाचार्य गंगा नंदिनी, योगाचार्य गायत्री, उमा एवं रोहन ने सत्रों का संचालन करते हुए साधकों का मार्गदर्शन किया।

आयोजन के अंत में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि मौन साधना से उन्हें मानसिक शांति, संतुलन और आत्मिक स्पष्टता प्राप्त हुई। यह रिट्रीट उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला सिद्ध हुआ।

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