भुवनेश्वर , अक्टूबर 25 -- रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रविवार को यहां कहा कि मौद्रिक नीति, वित्तीय स्थिरता, विनियमन, भुगतान और मुद्रा प्रबंधन से जुड़े दायित्वों को पूरा करने में तकनीक की केंद्रीय भूमिका है। वह यहां केंद्रीय बैंक के डॉटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान के उद्घाटन समारोह में स्वागत भाषण दे रहे थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, ओडिशा के राज्यपाल और मुख्यमंत्री की उपस्थिति में इन सुविधाओं का उद्घाटन किया। आरबीआई प्रमुख ने प्रणाली पर जनता के भरोसे के लिए उसकी सुरक्षा और मजबूती को महत्वपूर्ण बताया। इस संदर्भ में उन्होंने साइबर सुरक्षा और डाटा सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भुवनेश्वर में शुरू की गयी सुविधाओं से रिजर्व बैंक की साइबर सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी।

गवर्नर मल्होत्रा ने कहा, 'कोई भी सिस्टम जो सुरक्षित नहीं है, वह जनता का विश्वास पाने में सक्षम नहीं है। इसलिए, हमने सूचना प्रौद्योगिकी संचालन व्यवस्था, साइबर प्रणली की मजबूती, आउटसोर्सिंग, थर्ड-पार्टी जोखिम, तथा डिजिटल भुगतान सुरक्षा के लिए ज़रूरी फ्रेमवर्क लागू किए हैं।"उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अप्रैल 2024 में भारतीय रिजर्व बैंक के 90वें स्थापना वर्ष समारोह के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और नयी तकनीकों को अपनाने, बैंकिंग के डिजिटल होने के साथ-साथ साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने, और इस काम के लिए कुशल मानव संसाधन को तैयार करने का सुझाव दिया था। भुवनेश्वर का डेटा सेंटर और साइबर प्रशिक्षण संस्थान उसी दिशा में आरबीआई के प्रयासों का हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा, ' नया डेटा सेंटर हमारे महत्वपूर्ण सिस्टम की क्षमता, जुझारूपन और सुरक्षा को आगे बढ़ाएगा। आईटी प्रशिक्षण केंद्र आरबीआई एवं पूरे बैंकिंग अधिकारियों के लिए साइबर सुरक्षा, डेटा साइंस, क्लाउड कम्प्यूटिंग और एआई के क्षेत्र में कौशल विकसित करने में सहयोग करेगा।"गवर्नर मल्होत्रा ने केंद्रीय बैंक के काम में अत्याधुनिक तकनीक के बढ़ते प्रयोग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रिजर्व बैंक स्वयं महत्वपूर्ण वित्तीय बाजार अवसंरचना का संचालन करता है। बैंकों के लिए तत्काल सकल भुगतान निपटान प्रणाली आरटीजीए के माध्यम से बड़ी राशि के लेन-देन का निपटान रियल-टाइम में होता है| ग्राहकों के धन अंतरण की एनईएफटी सुविधा के जरिए खुदरा लेन-देन 24 घंटे किए जा सकते हैं।

गवर्नर ने इसी संबंध में कोर बैंकिंग समाधान, 'ई-कुबेर' , सरकारी प्रतिभूतियों के ट्रेडिंग मंच एनडीएस-ओएम का जिक्र किया और कहा कि रिजर्व बैंक ने रिटेल डायरेक्ट ने इस बाजार को आम निवेशकों के लिए खोल दिया है।

उन्होंने कहा, "प्रौद्योगिकी ने हमारे आंतरिक कामकाज को भी रूपांतरित कर दिया है। प्रवाह के माध्यम से, विनियमित संस्थाएं विभिन्न लाइसेंस और अनुमोदन के लिए ऑनलाइन आवेदन करती हैं। हम अपने निर्गम कार्यालयों और करेंसी चेस्ट में डेटा-आधारित प्रणालियों के माध्यम से करेंसी नोट जारी करने, एवं उनके प्रसंस्करण और वितरण पर नज़र रखते हैं।"आरबीआई गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक का पर्यवेक्षण कार्य डेटा वेयरहाउस सीआईएमएस और दीक्षा (पर्यवेक्षण प्लेटफॉर्म) पर आधारित है। इनके जरिये जोखिमों का शीघ्र पता लगाने के लिए विश्लेषण और सुपटेक जैसे उपकरण शामिल हैं।

नागरिकों के शिकायतों के लिए समन्वित लोकप्रहरी योजना पोर्टल एक ही स्थान पर शिकायत की सुविधा प्रदान करता है|। इसी तरह उद्गम पोर्टल लोगों को बिना दावे के पड़ी जमा राशियों का पता लगाने में मदद करता है।

उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक की भूमिका बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र को प्रौद्योगिकी अपनाने में सुविधा प्रदान करना भी है। इसी संदर्भ में उन्होंने यूपीआई प्लेटफॉर्म, अकाउंट एग्रिगेटर ढांचे, एकीकृत कर्ज इंटरफ़ेस प्लेटफार्म, रिज़र्व बैंक इनोवेशन हब और विनियामकीय प्रयोगों के लिए सैंडबाक्स (नियंत्रित परिस्थितिकी) का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि आरबीआई के सीबीडीसी (सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी) की पायलट परियोजनांए आधुनिक तकनीकियों पर आधारित मुद्रा के नए स्वरूपों की संभावनाओं का शोध करती हैं। आरबीआई जवाबदेह और सुरक्षित एआई को भी प्रोत्साहित कर रहा है।

श्री मल्होत्रा ने कहा कि इस समारोह में प्रधानमंत्री सहित गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति दर्शाती है कि देश एक सुरक्षित, समावेशी और तकनीक-आधारित वित्तीय प्रणाली को कितना महत्व देता है।

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