मोहाली , सितंबर 02 -- पंजाब के मोहाली जिले में 25 अगस्त से आठ सितंबर तक 41वां राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. संगीता जैन ने लोगों से नेत्रदान का संकल्प लेने और अपने परिवार, रिश्तेदारों व मित्रों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की है।
डॉ. जैन ने कहा कि मृत्यु के बाद नेत्रदान के जरिए किसी दृष्टिबाधित व्यक्ति की जिंदगी में रोशनी लाई जा सकती है। दान की गई कॉर्निया का उपयोग कॉर्निया प्रत्यारोपण में किया जाता है, जिससे पात्र लोगों को दृष्टि प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने बताया कि नेत्रदान के लिए सहमति पत्र सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध हैं। इच्छुक लोग वहां जाकर अपना संकल्प दर्ज करा सकते हैं। ऑनलाइन पंजीकरण और नेत्रदान का संकल्प वेब पोर्टल के माध्यम से भी लिया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए स्वास्थ्य विभाग की हेल्पलाइन 104 पर संपर्क किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, नेत्रदान का संकल्प जीवनकाल में लिया जाता है जबकि वास्तविक नेत्रदान मृत्यु के बाद होता है। मृत्यु के बाद छह से आठ घंटे के भीतर आंखें निकालना आदर्श माना जाता है। किसी भी उम्र का व्यक्ति नेत्रदान का संकल्प ले सकता है। चश्मा लगाने वाले या आंखों की सर्जरी करा चुके लोग भी पात्र हो सकते हैं।
डॉ. जैन ने बताया कि नेत्र निकालने की प्रक्रिया सामान्यतः 10 से 15 मिनट में पूरी हो जाती है और इससे चेहरे पर कोई दिखाई देने वाला निशान या विकृति नहीं आती। हालांकि, एचआईवी/एड्स, पीलिया, ब्लड कैंसर और कुछ गंभीर संक्रामक बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति नेत्रदान के लिए पात्र नहीं हो सकते।
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