श्रीनगर , अगस्त 04 -- जम्मू-कश्मीर के धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठन 'मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलेमा' (एमएमयू) ने मंगलवार को मुस्लिम छात्रों और शिक्षण संस्थानों को प्रभावित करने वाले हालिया घटनाक्रमों पर गहरी चिंता व्यक्त की। संगठन ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के रामपुर में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर मंडरा रहे विध्वंस के खतरे का मुद्दा उठाया।
एमएमयू ने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय के 40 में से 38 भवनों को गिराए जाने की खबर से उसे गहरा दुख पहुंचा है। इस यूनिवर्सिटी में करीब 3,000 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।
एमएमयू ने कहा, "हालांकि भवनों के गिराए जाने के आदेश पर कथित तौर पर अंतरिम राहत मिल गई है लेकिन संस्थान के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता अभी भी गंभीर चिंता का विषय है।" संगठन के अनुसार, विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों ने इस मामले को उनके सामने उठाया है, क्योंकि इससे सीधे तौर पर उनके, उनके भविष्य और उन परिवारों के भविष्य पर असर पड़ रहा है जो उन्हें पढ़ाई के लिए बाहर भेजते हैं।
एमएमयू ने कहा कि किसी संस्थान पर चाहे जो भी कानूनी या नियामक उल्लंघन के आरोप हों, उन्हें दूर करने के लिए स्थापित कानूनी और प्रशासनिक तंत्र मौजूद हैं। बयान में कहा गया, "हजारों मासूम विद्यार्थियों के भविष्य को विश्वविद्यालय की इमारतों के साथ नहीं ढहाया जा सकता। ऐसे विवादों में छात्रों की कोई भूमिका नहीं होती और उन्हें इसकी कीमत नहीं चुकानी चाहिए।"मजलिस ने जम्मू में 'श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस' के बंद होने का भी जिक्र किया, जिससे वहां के छात्रों की पढ़ाई बाधित हुई और उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई।
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