नयी दिल्ली , मार्च 27 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि मोदी सरकार ने देश में निवेशकों के लिए भरोसा और अच्छा वातावरण दिया है जिसके कारण देश की अर्थव्यवस्था ग्यारहवें स्थान से चौथे स्थान पर पहुंची है।
भाजपा सदस्य कंगना रनौत ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशेाधन) विधेयक 2025 पर चर्चा में शामिल होते हुए कहा कि एक वक्त था जब कांग्रेस के प्रधानमंत्री के समय बड़े-बड़े उद्योगपतियों के कर्जे फोन पर मिला करते थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में आईबीसी आने के बाद 87 प्रतिशत मामले अदालतों में जाने से पहले ही हल हो गये। इससे आईबीसी का डर और नेता नीयत और नीति पर जनता का विश्वास की वजह संभव है। उन्होंने कहा कि देश का नेतृत्व इतना कर्मठ और कर्मयोगी है जिसके वजह से एक डिफाल्टर भी देश के प्रति अपना कर्तव्य निभाना चाहता है। उन्होंने कहा कि पहले बैंकों की खस्ता हालात थी लेकिन मोदी सरकार में बैंकों की स्थिति सुधरी है। सरकार ने लोगों को आत्मविश्वास जगाने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि इस विधेयक के आने के बाद देश से बाहर भागने वाले लोगों से भी बैंक अपनी रकम वसूल कर सकती है। यह विधेयक देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला है।
भाजपा के जगदंबिका पाल ने कहा कि पिछले दस वर्षों में लोगों का वित्तीय समावेशन हुआ। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के वित्तीय समावेशन की वजह से देश की अर्थव्यवस्था दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था बन गयी है। यह विधेयक सफल व्यवस्था जो प्रभावी हुई है उसे और प्रभावी बनाने के लिए लाया गया है।
उन्होंने कहा कि 2014 में भारत की बैंकिंग व्यवस्था की हालत खराब थी लोगों को ऋण नहीं मिल रहा था। बैंक दिवालिया होने के कगार पर थे लेकिन आज बैंक की व्यवस्था मजबूत हुई है। पहले केवल फोन पर ही बैंक लोन दे दिया जाता था और लोग ऋण लेकर विेदेश चले जाते थे। उस समय लगातार एनपीए बढता गया जिससे बैंकों के सामने संकट उत्पन्न हो गया था।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय में निवेशकों का भरोसा टूट गया था लेकिन भाजपा की सरकार की नीतियों के कारण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है और विदेशी निवेश आ रहा। भारत भरोसे का देश बना है। उन्होंने कहा कि अब रिकवरी रेट 20 प्रतिशत 36 प्रतिशत हो गयी है। उन्होंने कहा कि बैंक की स्थिति ठीक होती है तो गांव के लोगों को भी ऋण मिलता है। मोदी सरकार के आने के बाद बैंकों की स्थिति को लगातार सुधार किया गया है। इस विधेयक से अब 90 दिनों के भीतर अपील का फैसला लिया जायेगा जिससे निश्चित तौर से हमारी स्थित मजबूत होगी। अब कर्ज नहीं चुकाने पर एनसीएलटी में तत्काल केस शुरु हो जाता है जबकि पहले केस शुरु होने में ही महीनों लग जाते थे।
उन्होंने कहा कि इस विधेयक में क्रेडिटर्स की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाया गया है। अब बैंक केवल दर्शक नहीं वह निर्णय लेने वाला होगा। मोदी सरकार के आने के बाद से बैंकों की गैर निष्पादित सम्पत्तियां 12 प्रतिशत से अधिक थीं जो अब घटकर 2.3 प्रतिशत रह गयी हैं। सरकारी बैंक मुनाफे में आ गये हैं। वित्तीय घाटा कम हुआ है और निवेश बढ़ा है। मोदी सरकार के नेतृत्व में दुनिया का निवेश का सबसे लोकप्रिय स्थान भारत बना है।
कांग्रेस के गोवाल कागदा पड़वी ने कहा कि यह विधेयक समय सीमा की गति की बात करती है जबकि संस्थाओं में गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा कि सिर्फ समय-सीमा और त्वरित कार्रवाई की बात की गयी है लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग कंपनियों का कुप्रबंधन करते हैं और बैंकों से पैसे लेकर देश से बाहर चले जाते हैं उनको कौन वापस लायेगा। हम धनशोधन की बात करते हैं लेकिन हमें स्वीकार करना होगा कि इसमें आधा सुधार किया गया है। सरकार एक ऐसा कानून पास करना चाहती है जो प्रक्रियाओं को मजबूत करेगा लेकिन लोगों की रक्षा नहीं करेगा। इस विधेयक को प्रवर समिति को भेजा जाना चाहिए।
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