नयी दिल्ली , मई 27 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को यहां सेवा तीर्थ में प्रगति की 51वीं बैठक की अध्यक्षता की जिसमें 30, 000 करोड रुपए की सात महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा की गई।

जिन परियोजनाओं की समीक्षा की गई वे रेलवे, विद्युत और सड़क क्षेत्रों से संबंधित हैं और इनका काम नौ राज्यों में चल रहा है। आर्थिक विकास और जनकल्याण के लिए महत्वपूर्ण इन परियोजनाओं की समीक्षा समय-सीमा, विभिन्न एजेंसियों के समन्वय और समस्याओं के समयबद्ध समाधान पर विशेष ध्यान देते हुए की गई। प्रधानमंत्री ने केन-बेतवा लिंक परियोजना और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 की भी समीक्षा की।

विद्युत क्षेत्र की परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री ने शहरी क्षेत्रों में छतों पर सौर ऊर्जा अपनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया, विशेष रूप से शहरों, आवासीय समूहों और सार्वजनिक संस्थानों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने कहा कि बिजली की लागत कम करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और परिवार तथा समुदाय स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहित करने के लिए छतों पर सौर ऊर्जा को मिशन मोड में लागू किया जाना चाहिए।

सड़क और बंदरगाह संपर्क परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि वधावन बंदरगाह को बंदरगाह-आधारित बहु-माध्यमीय विकास के आदर्श के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जहाँ परिवहन के प्रत्येक प्रमुख माध्यम का निर्बाध एकीकरण कर भविष्य के लिए तैयार लॉजिस्टिक्स तंत्र बनाया जाए। इस परियोजना को केवल एक बंदरगाह के रूप में नहीं, बल्कि तटीय नौवहन, आंतरिक जलमार्गों, समर्पित माल गलियारों, उच्च गति रेल संपर्क, राजमार्गों और हवाई अड्डा संपर्क से जुड़े राष्ट्रीय प्रवेश द्वार के रूप में देखा जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि यह मिशन केवल अवसंरचना निर्माण तक सीमित न रहकर नियमित निगरानी, जनभागीदारी और विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय के माध्यम से मापनीय परिणाम सुनिश्चित करे। उन्होंने राज्यों से अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों और गोबरधन संयंत्रों सहित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित अवसंरचना कार्यों को शीघ्र पूरा करने का आग्रह किया।

केन-बेतवा नदी अंतर-संबंधन परियोजना की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि केन-बेतवा परियोजना अन्य राज्यों के लिए सहयोग, समयबद्ध स्वीकृतियों, प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी और मिशन मोड क्रियान्वयन के माध्यम से अंतर-राज्यीय जल समस्याओं के समाधान का आदर्श बननी चाहिए। राज्यों को ऐसे समान अवसरों की पहचान करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जहाँ नदी जोड़ो परियोजनाएँ, जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और प्रभावी सिंचाई को एकीकृत रूप से अपनाकर दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि सार्वजनिक परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि नागरिक आवश्यक सुविधाओं और विकास के लाभों से समय पर वंचित भी रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक देरी का सीधा प्रभाव लोगों के जीवन, क्षेत्रीय विकास और सार्वजनिक संसाधनों पर पड़ता है। उन्होंने बल दिया कि मंत्रालयों, विभागों और राज्यों को लंबित समस्याओं के समाधान, बाधाओं को दूर करने और कार्यों के शीघ्र क्रियान्वयन के लिए अधिक सक्रिय और समयबद्ध दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि नहर नेटवर्क के नवाचारी उपयोग की संभावनाओं का पता लगाया जाना चाहिए, जिसमें नहरों के किनारे और ऊपर सौर पैनल स्थापित कर स्वच्छ विद्युत उत्पादन शामिल है। इससे भूमि उपयोग का बेहतर अनुकूलन होगा, वाष्पीकरण से होने वाली हानि कम होगी, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पन्न होगी और जल अवसंरचना से अतिरिक्त आर्थिक मूल्य सृजित होगा।

बैठक की शुरुआत में कैबिनेट सचिव ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में राज्य स्तर पर सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की मासिक समीक्षा की व्यवस्था भी लागू कर दी गई है। इस तंत्र का उद्देश्य नियमित निगरानी, क्रियान्वयन संबंधी समस्याओं का त्वरित समाधान और राज्य तथा जिला स्तर पर अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इस पहल के अंतर्गत प्रथम चरण में स्वच्छ भारत मिशन को राज्य स्तर पर समीक्षा के लिए लिया गया है।

प्रगति एक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी-सक्षम, बहु-माध्यमीय मंच है, जिसका उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों का निर्बाध समन्वय कर सक्रिय शासन और समयबद्ध क्रियान्वयन को बढ़ावा देना है।

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