हैदराबाद , अक्टूबर 22 -- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को हैदराबाद में हर साल आयोजित होने वाले 'अलाई-बलाई दशहरा सम्मेलन' के ज़रिए तेलंगाना की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय की सराहना की।

श्री मोदी ने 'अलाई बलई दशहरा सम्मेलन-2026' के अवसर पर श्री दत्तात्रेय को भेजे गये आधिकारिक संदेश में कहा कि विजयादशमी के बाद आयोजित होने वाला यह पारंपरिक उत्सव विभिन्न समुदायों के बीच सामाजिक संबंधों, आपसी स्नेह और भाईचारे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।उन्होंने कहा, "अलाई-बलई का आयोजन विजयादशमी के बाद किया जाता है। यह त्योहार हमें बुराई पर अच्छाई की जीत की याद दिलाता है। इस अवसर पर आयोजित होने वाला ऐसा उत्सव लोगों को एक साथ लाता है और समाज में आपसी स्नेह तथा भाईचारे के बंधन को मजबूत करता है।"उन्होंने कहा कि यह मंच क्षेत्र के लोक कलाकारों को अपनी पारंपरिक प्रतिभा प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। साथ ही इसके माध्यम से लोगों को पारंपरिक व्यंजनों, लोक संगीत, नृत्य और प्रामाणिक कला रूपों से सीधे जुड़ने का अवसर मिलता है।

प्रधानमंत्री ने इस वर्ष के इस आयोजन का मुख्य विषय 'नशा मुक्त भारत, विकसित भारत 2047' का स्वागत किया। उन्होंने देश के युवाओं को नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से बचाने और देश के दीर्घकालिक विकास को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अपने संदेश में लिखा, "विकसित भारत का सपना ऐसे स्वस्थ समाज की मांग करता है, जहां हमारे युवा नशीले पदार्थों के हानिकारक प्रभावों से मुक्त रहकर अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर सकें। इस तरह के त्योहार और सामुदायिक आयोजन युवाओं से जुड़ने और उन्हें प्रेरित करने का अवसर प्रदान करते हैं।"उन्होंने इस आयोजन से जुड़े सभी प्रतिभागियों और आयोजकों को शुभकामनाएं भी दीं।

अलाई बलई फाउंडेशन के नेतृत्व में हर साल आयोजित होने वाले इस सांस्कृतिक उत्सव में हजारों लोग शामिल होते हैं। इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, नागरिक समाज के सदस्य और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कलाकार हिस्सा लेते हैं। इस आयोजन का उद्देश्य तेलंगाना की विविधतापूर्ण सांस्कृतिक परंपराओं का उत्सव मनाना है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित