अहमदाबाद , मार्च 31 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को यहां साणंद में केन्स टेक्नोलॉजी के सेमीकंडक्टर प्लांट का शुभारंभ किया और कहा कि यह मज़बूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है जो भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा को मज़बूत करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह गौरव की बात है कि एक भारतीय कंपनी ने सेमीकंडक्टर चिप निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा है। उन्होंने कहा कि यह कंपनी अब वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बन गई है। उन्होंने कहा, "यह एक शानदार शुरुआत है। आने वाले दिनों में, कई भारतीय कंपनियां वैश्विक सहयोग के माध्यम से दुनिया को मज़बूत सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला प्रदान करेंगी।"श्री मोदी ने कहा कि आज की यह उपलब्धि वास्तव में ' मेक इन इंडिया , मेक फॉर द वर्ल्ड ' (भारत में बनाओ, दुनिया के लिए बनाओ) के मंत्र को साकार करती है। उन्होंने कहा," यह प्लांट कैलिफ़ोर्निया स्थित एक कंपनी को 'इंटेलिजेंट पावर मॉड्यूल्स' की आपूर्ति कर रहा है और इसके उत्पादन का बड़ा हिस्सा पहले ही निर्यात के लिए बुक हो चुका है।"प्रधानमंत्री ने कहा कि साणंद और सिलिकॉन वैली के बीच असल में यह एक नया पुल बन गया है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "साणंद में बने ये मॉड्यूल्स अमरीकी कंपनियों तक पहुंचेंगे और वहां से पूरी दुनिया को ऊर्जा प्रदान करेंगे।"उन्होंने कहा कि ये भारत और दुनिया, दोनों जगह इलेक्ट्रिक वाहन इकोसिस्टम और भारी उद्योगों को मज़बूत करेंगे। उन्होंने ऐसी वैश्विक साझेदारियों को दुनिया के बेहतर भविष्य की नींव बताया। प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा, "यह सिर्फ़ एक प्रोडक्ट की बात नहीं है, यह भारत के वैश्विक बाज़ार में भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लायर बनने की बात है।"श्री मोदी ने महामारी से लेकर भू-राजनीतिक संघर्षों तक इस दशक में आई चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला खासकर चिप, दुर्लभ खनिज और ऊर्जा के क्षेत्र में, सबसे ज़्यादा प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कि ये रुकावटें पूरी मानवता की प्रगति में बाधा डालती हैं। श्री मोदी ने कहा, "भारत जैसे लोकतांत्रिक देश का इस दिशा में आगे बढ़ना पूरी दुनिया के विकास के लिए बहुत ज़रूरी है।"उन्होंने बताया कि सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता का असर एआई, इलेक्ट्रिक वाहनों, स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में भी आत्मनिर्भरता के रूप में दिखता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "यह मिशन सिर्फ़ एक औद्योगिक नीति नहीं है, यह भारत के आत्मविश्वास की घोषणा है।"प्रधानमंत्री ने मिशन की प्रगति का ब्योरा देते हुए बताया कि छह राज्यों में 1,60,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 10 परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिनमें केन्स और माइक्रोन की परियोजनाएं महत्वपूर्ण हिस्से हैं। उन्होंने स्वदेशी 'ध्रुव 64' माइक्रोप्रोसेसर के विकास की भी जानकारी दी जो 5 जी इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक ऑटोमेशन के लिए सुरक्षित प्रोसेसर प्लेटफ़ॉर्म मुहैया कराता है। उन्होंने कहा, "भारत सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के हर स्तर पर डिज़ाइन और निर्माण की क्षमता विकसित कर रहा है।"श्री मोदी ने भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा के अगले चरण की घोषणा करते हुए, 'इंडिया-सेमीकंडक्टर मिशन 2.0' के बारे में बात की, जिसे इस वर्ष के केंद्रीय बजट में पेश किया गया था। सेमीकंडक्टर उपकरणों और सामग्रियों के घरेलू उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करते हुए, इस नए चरण का लक्ष्य पूर्ण-स्तरीय भारतीय सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करना है। उन्होंने कहा, "हमारा प्रयास अब ऐसा इकोसिस्टम बनाना है, जिससे हम घरेलू और वैश्विक, दोनों तरह की सप्लाई चेन में बड़ी साझेदारियाँ कर सकें।"प्रधानमंत्री ने भविष्य के लिए तैयार श्रमशक्ति बनाने के भारत के प्रयासों पर बल दिया। उन्होंने बताया कि 85,000 से ज़्यादा डिज़ाइन पेशेवरों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य बहुत जल्द हासिल कर लिया जाएगा। उन्होंने 'चिप्स टू स्टार्टअप' कार्यक्रम के बारे में भी बात की, जिसके तहत लगभग 400 विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप्स को आधुनिक डिज़ाइन टूल्स तक पहुँच दी गई है, जिसके परिणामस्वरूप 55 से ज़्यादा चिप का डिज़ाइन और निर्माण हुआ है।उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "तकनीकी विकास और कुशल श्रमशक्ति को साथ-साथ चलना चाहिए, और भारत इन दोनों को सुनिश्चित कर रहा है।"श्री मोदी ने उद्योग के अनुमानों का हवाला देते हुए बताया कि भारत का सेमीकंडक्टर बाज़ार अभी लगभग 50 अरब डालर का है और इस दशक के अंत तक इसके 100 अरब डॉलस से ज़्यादा होने का अनुमान है। भारत के सेमीकंडक्टर संकल्प के बारे में वैश्विक निवेशकों में दिख रहे ज़बरदस्त उत्साह को देखते हुए, श्री मोदी ने कहा, "हमारा लक्ष्य अपनी ज़रूरतों के लिए ज़्यादा से ज़्यादा चिप्स यहीं भारत में बनाना है।"प्रधानमंत्री ने भारत के समानांतर प्रयासों के बारे में बात की, जिनका उद्देश्य कच्चे माल की मज़बूत आपूर्ति श्रृंखला को सुनिश्चित करना है। इन प्रयासों में 'पैक्स सिलिका' में भारत की सदस्यता और 'राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन' की शुरुआत शामिल है।
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