मैहर , जून 25 -- मध्यप्रदेश की आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) रीवा इकाई ने मैहर जिले की जनपद पंचायत मैहर में अपात्र व्यक्तियों के नाम बीपीएल सूची में जोड़ने, फर्जी बीपीएल प्रमाण पत्र जारी करने और भ्रष्टाचार किए जाने के मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जनपद पंचायत मैहर में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना अपात्र व्यक्तियों के नाम बीपीएल सूची में जोड़े गए तथा फर्जी बीपीएल प्रमाण पत्र जारी किए गए। साथ ही एक ही बीपीएल क्रमांक पर दो हितग्राहियों के नाम दर्ज कर अनियमितताएं की गईं।
जांच में पाया गया कि पटवारी सर्वे रिपोर्ट और तहसीलदार के सत्यापन अथवा लिखित अनुशंसा के बिना ही अपात्र व्यक्तियों के नाम गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) सूची में शामिल कर दिए गए। अब तक की जांच में 111 अपात्र हितग्राहियों के नाम पर फर्जी बीपीएल प्रमाण पत्र जारी किए जाने की पुष्टि हुई है।
बताया गया है कि इन फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर वर्ष 2018 से वर्तमान तक विभिन्न शासकीय योजनाओं का अनुचित लाभ लिया गया, जिससे शासन को आर्थिक क्षति पहुंची।
प्रथम दृष्टया आरोप प्रमाणित पाए जाने पर तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी वेदमणि मिश्रा, आर.एन. शर्मा, सहायक विकास विस्तार अधिकारी प्रेमलाल गौतम, तत्कालीन विकासखंड अधिकारी सुदामा प्रसाद चौरसिया, तत्कालीन बीपीएल प्रभारी दीपक मिश्रा, वर्तमान बीपीएल प्रभारी रामसुंदर मिश्रा तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है।
ईओडब्ल्यू ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 409, 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(ए) और 13(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है।
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