बेंगलुरु , जुलाई 07 -- कर्नाटक में मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (मुडा) में ज़मीन आवंटन के कथित घोटाले को लेकर राजनीतिक सरगर्मी मंगलवार को उस समय फिर से तेज हो गई जब एक कार्यकर्ता फ़ोरम ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से शहरी विकास मंत्री डॉ. यतींद्र सिद्दारमैया से उनका विभाग तुरंत वापस लेने की मांग की।
फ़ोरम ने आरोप लगाया कि उनके परिवार से जुड़ी कानूनी कार्यवाही के कारण हितों का टकराव हो रहा है।
मुख्यमंत्री को सौंपे गए तीन पन्नों के ज्ञापन में, 'रियल फाइटर्स फोरम' का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले एच.एम. वेंकटेश ने तर्क दिया कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के बेटे डॉ. यतींद्र को शहरी विकास विभाग का प्रमुख बने रहने देने से सरकार के निष्पक्ष कामकाज में जनता का भरोसा कम हो सकता है।
इस ज्ञापन में मुडा मामले से जुड़े मैसूर लोकायुक्त पुलिस, सांसदों एवं विधायकों के लिए बनी विशेष अदालत, कर्नाटक उच्च न्यायालय और प्रवर्तन निदेशालय की कार्यवाही का उल्लेख किया गया। इसमें तर्क दिया गया कि जब यह मामला न्यायिक जांच के दायरे में है तब शहरी विकास विभाग का प्रभार अपने पास रखने से हितों के टकराव की धारणा बनती है इसलिए इस विभाग को तुरंत किसी दूसरे मंत्री को सौंपने की मांग की गई।
फ़ोरम का कहना है कि शहरी विकास विभाग से जुड़े मामलों पर संभावित असर की धारणा भी लोकतांत्रिक मूल्यों को कमज़ोर कर सकती है इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री से डॉ. यतींद्र को कोई दूसरा विभाग सौंपने की अपील की।
यह मांग ऐसे समय में की गई है जब हाल ही में हुए मंत्रिमंडल फेरबदल के बाद डॉ. यतींद्र ने शहरी विकास विभाग का कार्यभार संभाला है। इस कदम की विपक्ष ने मुडा से जुड़े राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दे को लेकर पहले ही आलोचना शुरू कर दी है।
आरोपों को खारिज करते हुए डॉ. यतींद्र ने कहा कि हितों का कोई टकराव नहीं है और अपने पोर्टफोलियो में किसी भी बदलाव की ज़रूरत से इनकार किया। उन्होंने पत्रकारों से कहा, "मेरे पिता, माता और परिवार के सदस्यों के खिलाफ मुडा मामले की जांच लोकायुक्त पहले ही कर चुका है। जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट सक्षम अदालत में जमा कर उसे स्वीकार भी कर लिया गया है। अब इस जांच में दखल देने या इसे प्रभावित करने की कोई गुंजाइश नहीं है।"उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न तो उन्होंने शहरी विकास विभाग का पद मांगा था और न ही कोई अतिरिक्त ज़िम्मेदारी मांगी थी। साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस आलाकमान और मुख्यमंत्री का जो भी फ़ैसला होगा वह उसे मानेंगे।
संबंधित ज्ञापन ने राजनीतिक रूप से विवादित मुडा मुद्दे को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है जिससे कांग्रेस सरकार पर नया दबाव बढ़ गया है क्योंकि विपक्ष ज़मीन आवंटन विवाद को लेकर लगातार उसे निशाना बना रहा है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित