बेंगलुरु , अक्टूबर 22 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मैसूर पैलेस में नंदीध्वज पूजा के दौरान पुलिस कर्मियों द्वारा चार राज्य मंत्रियों को कथित तौर पर रोके जाने की घटना की जांच के आदेश दिए हैं। इस घटना ने राज्य के प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल और पुलिस तथा जन प्रतिनिधियों के बीच समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

श्री शिवकुमार ने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को इस घटना की जांच करने, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करने और निष्कर्षों के आधार पर उचित कार्रवाई की सिफारिश करने का निर्देश दिया है।

यह घटना बुधवार को विजयादशमी समारोह के दौरान हुई, जब कन्नड़ और संस्कृति मंत्री शिवराज तंगादगी, कृषि मंत्री पी.एम. नरेंद्र स्वामी, एच.सी. बालकृष्ण और के.एस. बसवंथप्पा को प्रतिबंधित औपचारिक क्षेत्र में प्रवेश करने से कथित तौर पर रोक दिया गया था।

प्रवेश प्रतिबंधों का हवाला देते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने उन्हें अंदर जाने से मना कर दिया था। स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब मंत्री तंगादगी ने रोके जाने पर आपत्ति जताई और खुद को कन्नड़ और संस्कृति प्रभारी मंत्री के रूप में पहचाना। बाद में श्री शिवकुमार के हस्तक्षेप के बाद मामले को सुलझा लिया गया, जिसके बाद मंत्रियों को कार्यक्रम स्थल पर जाने की अनुमति दी गई।

अब इस मसले पर राजनीति शुरू हो गयी है। जनता दल (सेक्युलर) ने कांग्रेस सरकार पर सामाजिक न्याय के मामले में पाखंड का आरोप लगाया है और मांग की है कि मंत्री अपनी गरिमा बनाए रखें या इस्तीफा दें।

केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के नेतृत्व वाले राजग के सहयोगी दल जद(एस) ने इस घटना का इस्तेमाल कांग्रेस सरकार की डॉ. बी.आर. अंबेडकर के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठाने के लिए किया है, और आरोप लगाया है कि पार्टी सत्ता में रहते हुए दलितों की गरिमा की रक्षा करने में विफल रही है, जबकि केवल वोट बैंक के रूप में उनका इस्तेमाल करती है। उल्लेखनीय है कि इनमें से कुछ मंत्री दलित समुदाय के हैं।

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