मैनपुरी , सितंबर 15 -- उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग ने मंगलवार को जनपद स्तरीय बैठक में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को लेकर जनप्रतिनिधियों से विस्तृत जानकारी ली।
सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में आयोग के सदस्य संतोष कुमार विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और एसपी सिंह मौजूद रहे।
आयोग ने जिला पंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्यों, ब्लॉक प्रमुखों और ग्राम प्रधानों से पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, राजनीतिक सहभागिता, शिक्षा, महिलाओं की स्थिति, बाल विवाह तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं से संबंधित तथ्य और उनके क्षेत्रीय अनुभवों की जानकारी ली।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की कुल आबादी 15 लाख 22 हजार 311 है। इसमें अनुसूचित जाति की आबादी तीन लाख आठ हजार 865, अनुसूचित जनजाति की 470 और अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी नौ लाख 95 हजार 11 बताई गई। आयोग ने जनप्रतिनिधियों से इन आंकड़ों के संबंध में भी जानकारी और सहमति प्राप्त की।
जनप्रतिनिधियों ने बताया कि समग्र रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग की आर्थिक स्थिति सामान्य वर्ग की तुलना में बेहतर नहीं है। अनेक परिवारों के पास पर्याप्त आर्थिक और सामाजिक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी एक जाति की स्थिति के बजाय पूरे पिछड़ा वर्ग की समग्र स्थिति का आकलन किया जाना है।
राजनीतिक सहभागिता के संबंध में आयोग ने पिछड़ा वर्ग के लिए लागू आरक्षण से मिलने वाले अवसरों की जानकारी ली। जनप्रतिनिधियों ने बताया कि आरक्षित सीटों के माध्यम से पिछड़ा वर्ग के लोगों को स्थानीय निकायों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अवसर मिलता है।
आयोग ने महिलाओं की स्थिति और बाल विवाह को लेकर भी जानकारी ली। जनप्रतिनिधियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करने की स्वतंत्रता है और क्षेत्र में बाल विवाह की स्थिति नहीं है। शिक्षा के संबंध में बताया गया कि बच्चे सामान्यतः हाईस्कूल स्तर तक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। युवाओं की रोजगार प्राथमिकताओं तथा पुलिस और सेना में जाने की रुचि पर भी चर्चा हुई।
ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और आधारभूत सुविधाओं के संबंध में जनप्रतिनिधियों ने बताया कि पूर्व की अपेक्षा गांवों में काफी सुधार हुआ है। आयोग ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और संबंधित लोगों से प्राप्त आंकड़े, अनुभव एवं तथ्य उसके अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण होंगे। विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त जानकारी का संकलन कर समग्र स्थिति का आकलन किया जाएगा।
बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष अर्चना भदौरिया, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान तथा आयोग के विशेष कार्याधिकारी डॉ. असलम अंसारी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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