नयी दिल्ली , मार्च 13 -- प्रीति पाल, जो पैरालंपिक खेलों में ट्रैक एंड फील्ड इवेंट्स में दो मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट हैं, ने अपनी सफलता का राज बताया है। उनका कहना है कि वह सिर्फ़ अपनी टाइमिंग बेहतर करने पर ध्यान देती हैं और मेडल जीतने के बारे में सोचकर खुद पर दबाव नहीं डालतीं।

प्रीति ने 2024 पेरिस पैरालंपिक्स में दो ब्रॉन्ज मेडल जीते थे - एक महिलाओं की 100मी रेस में और दूसरा 200मी टी35 रेस इवेंट में।

बुधवार को चल रहे वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में महिलाओं की 100मी टी35/टी37 रेस में गोल्ड मेडल जीतने के बाद यूनीवार्ता से बात करते हुए प्रीति ने कहा: "यह वह मुकाबला है जहाँ हर कोई अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश करता है। यहाँ बात मेडल की नहीं, बल्कि टाइमिंग की होती है। यहाँ मुकाबला करने आए सभी एथलीटों ने अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश की है। मुझे तो यह भी लगता है कि मैं ठीक वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाई जैसा मैं ट्रेनिंग के दौरान कर रही थी।''वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री 11 से 13 मार्च तक जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में खेला जा रहा है, जिसमें आठ देशों के एथलीट हिस्सा ले रहे हैं।

प्रीति ने रेस में गोल्ड मेडल जीतने के लिए 14.46 सेकंड का समय लिया। रूस की मार्गरीटा माताएवा 16.25 सेकंड के समय के साथ दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि करीना माचुलस्काया ने 17.38 सेकंड के समय के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता।

एक पैरा एथलीट के तौर पर उन्हें जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा, उन पर बात करते हुए इस स्प्रिंटर ने कहा कि चोटें एथलीटों के लिए सबसे बड़ी रुकावटों में से एक बनी रहती हैं, खासकर तेज रफ़्तार वाले स्पीड सेशंस के दौरान।

"कई दिक्कतें आई हैं, खासकर चोटें। चोटें तो हर एथलीट को लगती हैं। जब हम स्पीड सेशंस शुरू करते हैं, तो चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है। रिकवरी बहुत जरूरी हो जाती है। हमारे कोच हमें आइस बाथ (बर्फ़ के पानी में नहाना) दिलवाकर रिकवरी में मदद करते हैं, जिससे बहुत फ़ायदा होता है।'' उन्होंने यह भी जोड़ा कि चोट-मुक्त रहने से एथलीट ट्रेनिंग, खान-पान और आराम पर बेहतर तरीके से ध्यान दे पाते हैं।

मुकाबले की अपनी तैयारियों के बारे में प्रीति ने बताया कि पिछले एक महीने से ट्रेनिंग के दौरान वह अपनी अब तक की सबसे अच्छी टाइमिंग हासिल कर रही थीं। 25 साल की इस एथलीट ने खिलाड़ियों को बेहतर बनाने में मदद करने के लिए नेशनल ट्रेनिंग ग्रुप को श्रेय दिया।

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