चंडीगढ़ , जून 17 -- पंजाब के वित्त, आबकारी एवं कराधान मंत्री सरदार हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार से मिथाइल अल्कोहल (मेथनॉल) को विनियमित और नियंत्रित करने के लिए तत्काल प्रभाव से विशेष केंद्रीय कानून बनाने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि जहरीली शराब से होने वाली मौतों को रोकने और मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी निगरानी व्यवस्था स्थापित करना समय की मांग है।

चंडीगढ़ में बुधवार को आबकारी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डी.के. तिवारी और आबकारी एवं कराधान आयुक्त जितेंद्र जोरवाल के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए श्री चीमा ने कहा कि भारत में उपयोग होने वाले लगभग 90 प्रतिशत मेथनॉल का आयात विदेशों से किया जाता है। यह रसायन विभिन्न बंदरगाहों और कस्टम केंद्रों से देश में प्रवेश करने के बाद कई राज्यों से होकर अपने औद्योगिक उपभोक्ताओं तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि मेथनॉल की आवाजाही कई राज्यों की सीमाओं से गुजरती है, इसलिए इसकी निगरानी और नियंत्रण संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची-1 की प्रविष्टि 41 के अंतर्गत आता है, जो विदेशी व्यापार और अंतरराज्यीय वाणिज्य से संबंधित है। ऐसे में कोई भी राज्य सरकार अकेले इस पूरी आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी नहीं कर सकती। इसके लिए केंद्रीय स्तर पर कानूनी और तकनीकी ढांचा आवश्यक है।

श्री चीमा ने मेथनॉल की ऑनलाइन उपलब्धता को भी गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि यह जहरीला रसायन प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर आसानी से उपलब्ध है और इसकी खरीद के लिए न तो पहचान सत्यापन की आवश्यकता है और न ही किसी उद्देश्य की घोषणा करनी पड़ती है। इससे इसकी अवैध खरीद और दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मेथनॉल से संबंधित नियामक व्यवस्था कई पुराने कानूनों जैसे पॉयजन्स एक्ट 1919, पेट्रोलियम एक्ट 1934 और ज्वलनशील पदार्थ अधिनियम 1952 में बंटी हुई है। इनमें से कोई भी कानून विशेष रूप से मेथनॉल के दुरुपयोग और उससे उत्पन्न खतरों से निपटने के लिए तैयार नहीं किया गया था। इन कानूनों में न तो समर्पित ट्रैकिंग प्रणाली है और न ही खरीदारों के पंजीकरण और अंतरराज्यीय निगरानी की व्यवस्था।

श्री चीमा ने कहा कि पारंपरिक राज्य आबकारी कानून मुख्य रूप से एथाइल अल्कोहल को नियंत्रित करने के लिए बनाये गये हैं, जबकि मेथनॉल पेट्रोकेमिकल प्रक्रियाओं से तैयार होने वाला उत्पाद है, जिसकी आपूर्ति और परिवहन का स्वरूप पूरी तरह अलग है। उन्होंने चेतावनी दी कि नीति आयोग द्वारा मेथनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में किये जा रहे प्रयासों के मद्देनजर इसकी आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो गयी है। वित्त मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार को पांच प्रमुख सुझाव भेजे हैं। इनमें मेथनॉल के आयात, भंडारण, परिवहन, वितरण और अंतिम उपयोग को नियंत्रित करने के लिए विशेष केंद्रीय कानून बनाना, बंदरगाह से अंतिम उपभोक्ता तक राष्ट्रीय ट्रैकिंग प्रणाली लागू करना, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर गैर-पंजीकृत खरीदारों को बिक्री पर प्रतिबंध लगाना, अवैध शराब में मेथनॉल मिलाने वालों के लिए कड़े दंड का प्रावधान करना तथा केंद्रीय वाणिज्य मंत्री की अध्यक्षता में सभी राज्यों के आबकारी मंत्रियों की बैठक बुलाना शामिल है।

श्री चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार राज्य स्तर पर भी पॉयजन्स एक्ट और अन्य संबंधित नियमों के तहत सख्त निगरानी, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि इस महत्वपूर्ण जन सुरक्षा मुद्दे पर केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों के साथ तत्काल संपर्क स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाये। उन्होंने कहा कि जहरीली शराब की घटनाओं को रोकने और नागरिकों की जान बचाने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वित प्रयास तथा मजबूत कानूनी व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।

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