शिलांग , अप्रैल 02 -- मेघालय सरकार ने आधिकारिक कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के गायन से जुड़ी चिंताओं को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया है।

श्री संगमा ने कहा, "यह केंद्र सरकार का जारी एक स्थायी आदेश है, जिसके तहत राज्यपाल की मौजूदगी वाले हर कार्यक्रम में 'वंदे मातरम' बजाना अनिवार्य है और इस दिशा-निर्देश का पूरे देश में समान रूप से पालन किया जा रहा है।" उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र के इस निर्देश का तब तक पालन करना जारी रखेगी, जब तक कि कोई अन्य आदेश नहीं मिल जाता।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपने आदेश में सरकारी कार्यक्रमों, आधिकारिक आयोजनों और स्कूलों की प्रार्थना सभाओं में 'वंदे मातरम' के सभी छह छंदों वाले पूर्ण संस्करण के गायन को अनिवार्य कर दिया है।

अब तक की परंपरा बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की इस प्रसिद्ध रचना के केवल पहले दो छंदों को गाने की रही थी, जिसे 1950 में संविधान सभा ने बतौर राष्ट्रीय गीत अपनाया था।

विपक्षी 'वॉयस ऑफ द पीपल पार्टी' (वीपीपी) और 'खासी स्टूडेंट्स यूनियन' (केएसयू) सहित कई समूहों ने वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण के गायन का विरोध किया है। उनका तर्क है कि राष्ट्रीय गीत के बाद के छंद हिंदू देवी-देवताओं का आह्वान करते हैं और वे स्वदेशी आदिवासी मान्यताओं और परंपराओं के मेल नहीं खाते।

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