शिलांग , मई 01 -- जनगणना 2027 के लिए मेघालय में 'स्व-गणना' का चरण शुक्रवार को शुरू हो गया। यह भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

मेघालय के राज्यपाल सी.एच. विजयशंकर ने शिलांग के लोक भवन में ऑनलाइन जनगणना पोर्टल के माध्यम से अपनी स्व-गणना पूरी कर इस पहल की शुरुआत की। इस अवसर पर मेघालय के जनगणना संचालन निदेशक बिस्वजीत पेगू, संयुक्त निदेशक शुभाशीष चटर्जी, पूर्वी खासी हिल्स की उपायुक्त आर.एम. कुर्बाह और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

राज्यपाल ने डिजिटल प्रक्रिया की सुविधा, पारदर्शिता और दक्षता पर जोर देते हुए नागरिकों से इसमें सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने जनगणना संचालन निदेशालय को इस कार्य को सटीकता और पेशेवर तरीके से समय पर पूरा करने के लिए अपनी शुभकामनाएं भी दीं। मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा के भी आज अपने आधिकारिक आवास पर डिजिटल स्व-गणना पूरी करने की उम्मीद है।

जनगणना संचालन निदेशक ने बताया कि नागरिक एक से 15 मई तक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना कर सकेंगे। उन्होंने कहा, "यह सुविधा व्यक्तियों को अपने घर का विवरण भरने की अनुमति देती है, जिसे बाद में प्रगणकों (एन्युमरेटर्स) द्वारा घर-घर जाकर सत्यापित किया जाएगा।" मेघालय में डेटा की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए लगभग 9,000 प्रगणक और पर्यवेक्षक तैनात किए जाएंगे।

जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी। श्री पेगू ने बताया कि पहले चरण में स्व-गणना के बाद 16 मई से 14 जून, 2026 तक 'हाउस लिस्टिंग ऑपरेशंस' (एचएलओ) आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान प्रगणक 33 प्रश्नों वाली एक प्रश्नावली के माध्यम से आवास की स्थिति, संपत्ति और बुनियादी सुविधाओं पर डेटा एकत्र करेंगे।

दूसरा चरण यानी 'जनसंख्या गणना' फरवरी 2027 में होगी, जिसके लिए संदर्भ तिथि एक मार्च, 2027 तय की गई है।

संयुक्त निदेशक ने बताया कि नागरिकों की सहायता के लिए एक राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर '1855' शुरू किया गया है। जनगणना के उद्देश्यों के लिए मेघालय की प्रशासनिक सीमाओं को 31 दिसंबर, 2025 तक फ्रीज कर दिया गया है। यह पूरी कवायद उपायुक्तों की देखरेख में आयोजित की जाएगी।

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