शिलांग , अप्रैल 17 -- ेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने कहा है कि राज्य सरकार, केंद्र सरकार के साथ मिलकर उन संशोधनों पर काम कर रही है जिससे 100 हेक्टेयर भूमि की कोयला खनन शर्त को छोटे खनिकों के लिये अधिक व्यावहारिक बनाया जा सके।
कई कोयला खनिक और भूमि स्वामी मांग कर रहे हैं कि राज्य और केंद्र सरकारें 5 मार्च, 2021 को अधिसूचित मानक संचालन प्रक्रियाओं में ढील दें, जो वैज्ञानिक कोयला खनन लाइसेंस देने के लिये कम से कम 100 हेक्टेयर भूमि की अनिवार्यता तय करती हैं।
जयंतिया हिल्स पब्लिक कोल माइनर्स, डीलर्स एंड सप्लायर्स एसोसिएशन ने तर्क दिया कि ये नियम छोटे भूखंड वाले खनिकों को कोयला खनन करने से रोकते हैं।
दरअसल, इस संगठन ने मेघालय उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है, जिसमें यह तर्क दिया गया है कि छोटे भूखंड वाले खनिकों को अपना काम जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिये।
खनन और भूविज्ञान विभाग का प्रभार संभालने वाले श्री संगमा ने पत्रकारों को बताया कि राज्य सरकार नई दिल्ली में सक्रिय रूप से इस बात के लिये प्रयास कर रही है कि 100 हेक्टेयर की शर्त में संशोधन किया जाये ताकि यह राज्य के कोयला खदानों के भूमि स्वामियों के हितों के अनुकूल हो सके।
श्री संगमा ने कहा, "हम भारत सरकार से उस विशिष्ट धारा में संशोधन करने का अनुरोध कर रहे हैं। मुझे सकारात्मक प्रतिक्रिया की आशा है, लेकिन जैसा कि आप जानते हैं, इसके लिये काफी तैयारी की आवश्यकता होती है - जिसमें भारत सरकार के स्तर पर प्रयास करना और प्रधानमंत्री, मंत्रियों तथा विभिन्न अधिकारियों के साथ बैठकें करना शामिल है।"मुख्यमंत्री ने कहा, "हम अपनी तैयारी कर रहे हैं। हम इस पर काम कर रहे हैं, लेकिन इसमें समय लग रहा है क्योंकि जैसा कि मैंने कहा, यह कोई सरल निर्णय नहीं है। यदि भारत सरकार एक राज्य की बात मान लेती है, तो आप देखेंगे कि अन्य राज्य भी आगे आयेंगे और विशेष प्रावधानों की मांग करेंगे।" इसके साथ ही उन्होंने इस मामले पर केंद्र से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद जताई।
हालाँकि, श्री संगमा ने आगाह किया कि इसमें शामिल कानूनी और प्रशासनिक जटिलताओं को देखते हुये इस प्रक्रिया में समय लगेगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक संशोधन पारित नहीं हो जाता, तब तक सरकार वैज्ञानिक खनन शुरू करने और लाइसेंस की स्वीकृति की सुविधा प्रदान करने के लिये मौजूदा नियमों के साथ ही आगे बढ़ेगी।
वैज्ञानिक खनन की व्यवहार्यता, विशेष रूप से खुली खनन विधियों से जुड़े पर्यावरणीय जोखिमों के संबंध में स्थानीय लोगों द्वारा उठाई गयी चिंताओं पर संगमा ने स्वीकार किया कि इसके लाभ और इसकी कमियां दोनों मौजूद हैं।
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