शिलांग , अगस्त 10 -- मेघालय प्रदेश कांग्रेस समिति (एमपीसीसी) ने सोमवार को प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम संशाेधन (एफसीआरए) विधेयक के खिलाफ एक विरोध रैली निकाली।
उन्होंने संसद में प्रस्तावित इस विधेयक में संशोधनों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की।पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विंसेंट एच पाला ने फायर ब्रिगेड ग्राउंड से डॉन बॉस्को स्क्वायर निकाले गये इस विरोध मार्च का नेतृत्व किया। उन्होंने प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक को "भारत के इतिहास के सबसे खतरनाक विधेयकों में से एक" बताया।
श्री पाला ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राजग सरकार पर संसद में जबरन विधेयक पारित कराने की कोशिश का आरोप लगाते हुए तर्क दिया कि प्रस्तावित संशोधन धार्मिक, शैक्षिक, चिकित्सा और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) पर बुरा असर डालेगा।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, "आज़ादी के बाद से विदेशी योगदान पाने वाले चर्चों, स्कूलों और एनजीओ पर यह पहला हमला है।" उन्होंने बताया कि प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक की धारा 16ए उन आस्था-आधारित संस्थाओं, एनजीओ और नागरिक समाज समूहों को निशाना बनाती है जिनके पंजीकरण रद्द कर दिए गए हैं, जिन्होंने खुद सदस्यता छाेड़ दी है या जिनकी मान्यता खत्म हो गई है।
प्रस्तावित कानून सरकार द्वारा नियुक्त आधिकारिक संस्था को विदेशी धन से बनी संपत्तियों को अस्थायी रूप से ज़ब्त करने और अंततः स्थायी रूप से अपने कब्जे में लेने की इजाज़त देता है।
श्री पाला ने बताया , "अगर आप अपना एफसीआरए पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं करा पाते हैं, या इसे सौंप देते हैं, तो सरकार आपकी संपत्ति पर कब्ज़ा कर सकती है। भले ही किसी चर्च या स्कूल को विदेशी धन का बहुत छोटा हिस्सा ही मिलता हो, फिर भी पूरी संपत्ति ज़ब्त की जा सकती है।"उन्होंने यह कहा कि पार्टी प्रस्तावित नियमन के खिलाफ नहीं है "हमें एफसीआरए से कोई समस्या नहीं है, बशर्ते इसका इस्तेमाल सही मकसद के लिए हो। हम पारदर्शिता और जवाबदेही का स्वागत करते हैं। लेकिन जो लोग धन का गलत इस्तेमाल करते हैं, उन्हें सज़ा दें, न कि सभी को।"श्री पाला ने कहा कि इन बदलावों का सबसे बुरा असर मेघालय पर पड़ेगा और अनेक शैक्षिक संस्थान विदेशी अंशदान पर पर निर्भर हैं।
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