इंफाल , मई 17 -- मणिपुरी सिनेमा पर रचनात्मक लेखन में उत्कृष्ट योगदान के लिए श्री मेघचंद्र कोंगबाम को प्रथम 'आरके बिदुर फिल्म समीक्षक पुरस्कार 2026' से सम्मानित किया गया है।

इंफाल के जवाहरलाल नेहरू मणिपुर नृत्य अकादमी के सभागार में रविवार को आयोजित 'कल्चरल फोरम, मणिपुर' के 68वें स्थापना दिवस समारोह में उन्हें यह सम्मान दिया गया। यह पुरस्कार उन्हें मणिपुरी सिनेमा पर रचनात्मक लेखन में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया है। इस कार्यक्रम के दौरान 'कल्चरल फोरम, मणिपुर' ने साहित्य, संगीत, नाटक, सिनेमा और संस्कृति के प्रति समर्पित प्रतिष्ठित हस्तियों को 35 विभिन्न श्रेणियों में वार्षिक पुरस्कार प्रदान किये।

इस पुरस्कार का नाम आरके बिदुर के नाम पर रखा गया है, जिन्हें मणिपुर में फिल्म सोसाइटी आंदोलन का अग्रदूत और 'मणिपुर फिल्म जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन' का संस्थापक अध्यक्ष माना जाता है। श्री बिदुर को इससे पहले 2008 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक के लिए 'स्वर्ण कमल' मिल चुका था। इसी के साथ मेघचंद्र कोंगबाम इसी वर्ष शुरू किये गये इस पुरस्कार को पाने वाले पहले व्यक्ति बन गये हैं।

श्री कोंगबाम का जन्म 23 दिसंबर 1957 को इंफाल के वांगखेई निंगथेम पुखरी मापल में हुआ था। वह दिवंगत कोंगबाम इबोयाइमा और कोंगबाम ओंग्बी इबेयाइमा के सबसे बड़े पुत्र हैं। वर्ष 1979 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएशन) की डिग्री पूरी करने और 1985 में भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) से 'फिल्म एप्रिसिएशन कोर्स' करने के बाद वह चार दशकों से अधिक समय तक समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में सिनेमा पर लिखते रहे।

उन्होंने भारतीय सिनेमा पर आधारित कई पुस्तकों में अपने लेखों का योगदान दिया है। इनमें इंडिया फिल्म कल्चर : इंडियन सिनेमा (2016), ग्लिम्प्सिस ऑफ सिनेमाज फ्रॉम इंडियाज नॉर्थ-ईस्ट (2020), क्रिटिक्स ऑन इंडियन सिनेमा (2021) और सिनेमैटिक कार्टोग्राफी : मैपिंग द ब्रेड्थ ऑफ इंडियन फिल्म लैंडस्केप्स (2025) शामिल हैं।

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ फिल्म क्रिटिक्स के कार्यकारी सदस्य श्री मेघचंद्र कोंगबाम को इससे पहले 2015 में 63वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक के लिए 'स्वर्ण कमल पुरस्कार' मिल चुका था। मेघचंद्र वर्तमान में 'फिल्म सोसाइटी ऑफ मणिपुर' के अध्यक्ष हैं। इसकी स्थापना 1966 में हुई थी और इसे उत्तर-पूर्व भारत की तीसरी सबसे पुरानी फिल्म सोसाइटी माना जाता है। वह 'सिने आर्टिस्ट्स एंड टेक्निशियंस एसोसिएशन, मणिपुर' और 'मणिपुर फिल्म जर्नलिस्ट्स एंड क्रिटिक्स एसोसिएशन' के संस्थापक सदस्य भी रहे थे।

अपने साहित्यिक और सांस्कृतिक जुड़ाव के अलावा उन्होंने मणिपुर सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में अपनी सेवाएं दीं। वह 1981 में जिला सूचना अधिकारी के रूप में विभाग में शामिल हुए थे और 2018 में निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने 2021 में मणिपुरी सिनेमा नामक पुस्तक भी लिखी थी।

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