बेंगलुरु , जून 19 -- तमिलनाडु विधानसभा के मेकेदातु बांध परियोजना पर आपत्ति जताते हुए सर्वसम्मति से इसके खिलाफ विरोध प्रस्ताव पारित करने के बाद, कावेरी जल विवाद एक बार फिर गरमा गया है।

इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा है कि राज्य सरकार मजबूती से अपने हितों की रक्षा करेगी और कानूनी दायरे में रहकर आगे बढ़ेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य केवल कावेरी के उस अतिरिक्त पानी का उपयोग करना चाहता है जो अन्यथा समुद्र में बह जाता है।

श्री खरगे ने कहा, " राज्य के हितों की रक्षा करना मेरी जिम्मेदारी है। वे अपने राज्य के हित में प्रस्ताव पारित करेंगे। अदालत का आदेश स्पष्ट है। हम केवल उस अतिरिक्त पानी को जमा कर रहे हैं जो समुद्र में जा रहा है और उसका उपयोग अपने राज्य के लोगों, बेंगलुरु और स्थानीय जिलों के लिए कर रहे हैं।"उन्होंने कहा कि इस परियाेजना की कानूनी तौर पर पहले ही जांच हो चुकी है और कर्नाटक यह सुनिश्चत करेगा कि किसी भी पक्ष के साथ कोई अन्याय न हो।

तमिलनाडु विधानसभा द्वारा कावेरी नदी पर बनने वाले मेकेदातु बांध का कड़ा विरोध करते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करने के कुछ घंटों उनका यह बयान आया है। प्रस्ताव में चेतावनी दी गई कि यह परियोजना कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अंतिम फैसले और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन करेगी।

तमिलनाडु का तर्क है कि कावेरी बेसिन में पानी की कमी है और बेसिन से जुड़े राज्यों के बीच पानी का बंटवारा पहले ही तय हो चुका है। इसलिए, बेसिन के सभी राज्यों की सहमति और केंद्र सरकार की मंज़ूरी के बिना अतिरिक्त स्टोरेज प्रोजेक्ट बनाने की कोई गुंजाइश नहीं है।

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