चेन्नई , जुलाई 28 -- तमिलनाडु के राजनीतिक दलों ने कर्नाटक द्वारा प्रस्तावित विवादास्पद मेकेदाटू बांध को लेकर केंद्र सरकार के रुख बदलने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने संसद में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री द्वारा दिये गये उस बयान को वापस लेने की मांग की है, जिसमें कहा गया था कि कावेरी नदी पर जलाशय के निर्माण के लिए निचले तटीय राज्य तमिलनाडु की सहमति की आवश्यकता नहीं है।
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप करने और जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी के बयान को वापस लेने की मांग की है। द्रमुक और अन्नाद्रमुक से लेकर पीएमके और वामपंथी दलों जैसे विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर इस मुद्दे पर पलटने का आरोप लगाया है।
सत्तारूढ़ टीवीके की नयी सहयोगी कांग्रेस और सरकार को बाहर से समर्थन दे रही भाकपा ने भी समान विचार व्यक्त करते हुये राज्यमंत्री की टिप्पणी को अस्वीकार्य बताया और इसे वापस लेने की मांग की।
कावेरी नदी कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों ही राज्यों में एक भावनात्मक मुद्दा है। तमिलनाडु का डेल्टा क्षेत्र भी इस पर निर्भर है। पीएमके नेता अंबुमणि के एक प्रश्न पर मंत्री के उत्तर ने राज्य के राजनीतिक दलों को नाराज कर दिया है। इसे मोदी सरकार का खुला पक्षपात माना जा रहा है।.भाजपा को छोड़कर अपना संगठन 'वी द लीडर्स' बनाने वाले के. अन्नामलाई ने सवाल उठाया कि क्या भगवा दल आगामी कर्नाटक विधानसभा चुनावों में लाभ के लिए ऐसा कर रहा है।
केंद्रीय राज्य मंत्री के रुख पर आपत्ति जताते हुये नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन (द्रमुक) ने कहा, "यह कहना कि मेकेदाटू परियोजना पर आगे बढ़ने के लिए कर्नाटक को तमिलनाडु की सहमति की आवश्यकता नहीं है, तमिलनाडु के वैध अधिकार पर सवाल उठाता है। इस मामले में किसी भी तरह की देरी डेल्टा किसानों की आजीविका के लिए हानिकारक होगी।"अपने 'एक्स' हैंडल पर एक पोस्ट में उन्होंने विजय से कर्नाटक को इस परियोजना पर आगे बढ़ने से रोकने के लिए त्वरित कदम उठाने का भी आह्वान किया।
अन्नाद्रमुक महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री इडाप्पडी के. पलानीस्वामी ने एक बयान में कहा कि पार्टी तमिलनाडु को वंचित करने की किसी भी साजिश की मूकदर्शक नहीं बनी रहेगी। उन्होंने कहा, "उच्चतम न्यायालय ने 2018 के अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि ऊपरी तटीय राज्य को कावेरी नदी में ऐसी कोई गतिविधि नहीं करनी चाहिये जो निचले इलाके में पानी के निर्धारित प्रवाह को प्रभावित करे।"उन्होंने आगे रेखांकित किया कि कावेरी तमिलनाडु में बहने वाली एकमात्र बारहमासी नदी है, इसलिए केंद्रीय मंत्री के बयान ने राज्य के लोगों के मन में गहरी आशंका पैदा कर दी है।
टीएनसीसी अध्यक्ष और लोकसभा सांसद माणिकम टैगोर ने राज्य मंत्री की टिप्पणियों को "अत्यंत खतरनाक; यह पूरी तरह से अस्वीकार्य" बताया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित