पटना, जून 15 -- बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सोमवार को कहा कि विद्यालयों में मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना और ड्रैगन फ्रूट जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने की पहल कृषि क्षेत्र में नवाचार और किसानों की आत्मनिर्भरता को नई दिशा मिलेगी।

श्री सिन्हा ने आज मीठापुर स्थित कृषि भवन में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना तथा मुख्यमंत्री बागवानी मिशन अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की।

इस बैठक में कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने, छात्रों में अनुसंधान एवं प्रयोगात्मक क्षमता विकसित करने तथा किसानों को मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने संबंधी योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान जानकारी दी गई कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना के अंतर्गत संचालित स्कूल सॉयल हेल्थ प्रोग्राम के तहत राज्य के कुल 160 पीएम श्री एवं राजकीय विद्यालयों में मिनी सॉयल टेस्टिंग प्रयोगशालाओं की स्थापना की जा चुकी है। इस पहल का उद्देश्य विद्यालय स्तर पर छात्रों को मृदा परीक्षण की वैज्ञानिक प्रक्रिया से जोड़ना तथा कृषि एवं पर्यावरण के प्रति उनकी समझ को विकसित करना है।

कृषि मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस कार्यक्रम का व्यापक विस्तार करते हुए राज्य के कुल 629 पीएम श्री एवं राजकीय विद्यालयों में मिनी सॉयल टेस्टिंग प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी और इस योजना को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया जाएगा। इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से कक्षा 7, 8, 9 एवं 11 के छात्र-छात्राएं मृदा परीक्षण, नमूना संग्रहण तथा मृदा स्वास्थ्य संबंधी व्यावहारिक गतिविधियों में भाग लेंगे। इससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, तकनीकी कौशल एवं अनुसंधान की प्रवृत्ति विकसित होगी।

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