जौनपुर , सितम्बर 12 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री ठा. उमानाथ सिंह को गुजरे 13 सितम्बर को 32 वर्ष हो जाएंगे, लेकिन आज भी उनकी प्रेरणा परिवार वालों को मिलती रहती है।
त्याग, परोपकार, समर्पण, शालीनता, सादगी, विनम्रता, धैर्य सब कुछ उनके व्यक्तित्व में समाहित था। उनका मानना था कि सत्य की डगर कठिन होती है लेकिन अंतिम में परिणाम सत्य के पक्ष में ही जाता है। मुझे अपने जीवन काल में मूल्य की राजनीति में विश्वास करते रहे। वह एक महान समाजसेवी थे।
राजनीतिक क्षेत्र में उनकी एक अलग पहचान थी, वह गरीबों के मसीहा थे। कोई भी व्यक्ति अगर उनके पास अपने कामों को लेकर जाता था तो वह उसका निवारण बड़े ही सहजता के साथ करते थे। मृदृल भाषी होने के कारण उनकी हर दल में एक अलग पहचान थी व मूल्यों की राजनीति में विश्वास करते थे। उनके विचारों से अधिकांश दल के बड़े नेता काफी प्रभावित रहते थे, वह जिले के विकास के लिए आजीवन संघर्षशील रहे।
स्व. उमानाथ सिंह पर लिखी गई साहित्य वाचस्पति श्रीपाल सिंह क्षेम की यह कविता भावों की आरती और आंसू का चंदन है, मां के सगुण सपूत तुम्हारी स्मृति का वंदन है। तुम आये तो तुमको पाकर पिता पुनित हुए थे, माता के वत्सल अंचल के तुम नव गीत हुए थे। ऐसा लगा रामसूरत सिंह का गृह नंदन है। मां के सगुण सपूत तुम्हारी स्मृति का वंदन है... आज भी प्रासांगिक है।
उनके अनुज भ्राता टीडी कालेज के पूर्व प्रबंधक स्व. अशोक सिंह अपने बड़े भाई उमानाथ सिंह के नाम से शिक्षण संस्थानों की स्थापना किया वह भी एक मिसाल है। कोरोना काल के दौरान अशोक सिंह भी दुनिया से विदा हो गये लेकिन जब तक वह रहे तब तक वह अपने बड़े भाई स्व. उमानाथ सिंह के पद चिन्हों पर चलकर समाज सेवा में समर्पित रहे।
उमा नाथ सिंह अपने सहयोगियों और समर्थकों की भीड़ से घिरे रहते थे। मोहल्ला नखास में स्थित मकान में बरामदे में चौकी पर बैठे उमानाथ सिंह समर्थकों से घिरे रहते थे। मकान में कभी ठा. रामलगन सिंह रहते थे और उनके यहां ही प्रदेश के प्रतिष्ठित कांग्रेस नेता ठॉ. हरगोविन्द सिंह भी रहते थे। उमानाथ सिंह की चौखट आम आदमी की चौखट बन गई थी। जहां गरीब, दु:खी आसानी से अपनी फरियाद सुनाने पहुंच जाता था, लेकिन वह हर व्यक्ति से सहजता से मिलते थे। स्व. उमानाथ सिंह ने अपने परिवार में जो संस्कार का बीज बोया वह आज भी विद्यमान है। उनका संस्कार ही उनके परिवार का धरोहर है उसी संस्कार के रास्ते पर चलकर उनके एक मात्र पुत्र पूर्व सांसद कृष्ण प्रताप सिंह केपी, भतीजे राघवेंद्र प्रताप सिंह, देवेंद्र प्रताप सिंह, शिवेंद्र प्रताप सिंह, धर्मेंद्र प्रताप सिंह समाज सेवा में लगे हुए हैं।
राघवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि 13 सितंबर को तिलकधारी महाविद्यालय के बलरामपुर हाल में फिन 12 बजे से श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया है, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के स्टांप राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार रविन्द्र जायसवाल और विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार गिरीश चंद्र यादव मौजूद रहेंगे। समारोह की अध्यक्षता भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्य मंत्री कृपा शंकर सिंह करेंगे।
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