फिरोजाबाद , अक्टूबर 28 -- महापुरुषों की मूर्तियों, द्वारों और पार्कों के निर्माण में सरकारी धन के दुरुपयोग के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने वर्तमान विधायक मनीष असीजा समेत नगर निगम के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी किए हैं। सभी को 31 अक्टूबर को जवाब दाखिल करने के लिए तलब किया गया है।
शिवसेना के जिला प्रमुख पं. राजीव कुमार शर्मा ने अधिवक्ता संजीव कुलश्रेष्ठ के माध्यम से न्यायालय में परिवाद दाखिल किया था। अधिवक्ता के अनुसार, संबंधित अधिकारियों के कार्यकाल में मूर्तियों, द्वारों और पार्कों के निर्माण से जुड़ी पत्रावलियां नगर निगम में उपलब्ध नहीं हैं, जबकि बिल-बाउचर और ऑर्डरशीट में इन कार्यों के लिए धनराशि जारी किए जाने का उल्लेख है।
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप की मूर्तियां निर्माण के लिए जयपुर भेजी गई थीं, लेकिन वे अब तक वापस नहीं आईं। इसके साथ ही निर्माण कार्यों में करोड़ों रुपये के सरकारी धन के कथित हेरफेर का आरोप लगाया गया है।
अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि निर्माण कार्यों और मूर्तियों से संबंधित पत्रावलियां उपलब्ध नहीं होने की जानकारी 23 सितंबर 2020 को तत्कालीन सहायक अभियंता अतुल पांडेय के हस्ताक्षरयुक्त शपथपत्र के माध्यम से दी गई थी। इसमें निर्माण लिपिक सुरेंद्र रावत और प्रमोद यादव की आख्या भी शामिल बताई गई है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विजय कुमार ने छह अक्टूबर को आदेश जारी कर तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों समेत संबंधित पटल सहायकों को नोटिस जारी किए। इनमें तत्कालीन अधिशासी अधिकारी डीके सिन्हा और अनिल कुमार, सहायक अभियंता दिनेश सचान, रामशंकर राम और अतुल पांडेय तथा अवर अभियंता प्रभाकर निरंजन और ओपी निगम शामिल हैं। निर्माण लिपिक सुरेंद्र रावत और प्रमोद यादव को भी नोटिस जारी किए गए हैं।
न्यायालय ने सभी संबंधित लोगों को 31 अक्टूबर को जवाब दाखिल करने के लिए तलब किया है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित