बैतूल , अगस्त 26 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में मूंग खरीदी में सामने आई गंभीर अनियमितता के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। किसानों से खरीदी गई अच्छी गुणवत्ता की मूंग में कथित तौर पर दाल और मिट्टी मिलाकर सरकारी उपार्जन में गड़बड़ी किए जाने की जांच में पुष्टि होने के बावजूद अब तक दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है। कार्रवाई के नाम पर मां चंडी वेयर हाउस, जीन को ब्लैकलिस्ट कर वहां जिंसों के भंडारण पर रोक लगाई गई है।
प्राथमिक सहकारी समिति बोरगांव जीन द्वारा मां चंडी वेयर हाउस में मूंग खरीदी की जा रही थी। आरोप है कि खरीदी केंद्र पर किसानों से अच्छी गुणवत्ता की मूंग लेने के बाद रात के समय उसमें दाल और मिट्टी मिलाकर उसकी गुणवत्ता खराब की जा रही थी। सर्वेयरों ने चार अगस्त की रात कथित गड़बड़ी पकड़ी और इसका वीडियो बनाया। इसके बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में आया।
मामले की जांच के लिए छह अगस्त को डीएमओ प्रदीप गरेवाल और डीडीए रामगोपाल रजक मौके पर पहुंचे। जांच में दो स्टेक में रखी करीब छह हजार बोरियों की मूंग में नौ प्रतिशत तक मिलावट अथवा क्षतिग्रस्त दाने पाए गए और इसे नॉन एफएक्यू माना गया। जांच प्रतिवेदन में अनियमितता का उल्लेख होने के बावजूद गोदाम को तत्काल सील नहीं किया गया और न ही किसी व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
करीब 20 दिन बाद जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी जानकारी में बताया गया कि संयुक्त दल के निरीक्षण में स्टेक की ऊपर की कुछ बोरियों में नॉन एफएक्यू मूंग मिली। इसके बाद मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन ने मां चंडी वेयर हाउस को ब्लैकलिस्ट कर वहां जिंसों के भंडारण पर प्रतिबंध लगा दिया।
केवल गोदाम को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि यदि सरकारी उपार्जन की मूंग में मिलावट और गुणवत्ता से छेड़छाड़ सामने आई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। पड़ोसी जिले में इसी तरह के मामले में अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज किए जाने का हवाला देते हुए बैतूल में कार्रवाई की गति पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
मांग की जा रही है कि जिले के सभी 13 मूंग खरीदी केंद्रों पर उपार्जित मूंग की उच्चस्तरीय टीम से जांच कराई जाए। आशंका जताई जा रही है कि जीन केंद्र पर सर्वेयरों की सतर्कता से मामला सामने आया, जबकि अन्य केंद्रों पर ऐसी गड़बड़ी पकड़ में नहीं आई हो।
सूत्रों के अनुसार मां चंडी वेयर हाउस में पूर्व में गेहूं खरीदी के दौरान किसानों से निर्धारित मात्रा से अधिक गेहूं तौलने की शिकायत भी सामने आई थी, लेकिन उसकी जांच नहीं होने की बात कही जा रही है। मूंग खरीदी प्रकरण में भी प्राथमिकी दर्ज नहीं होने से अब प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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