नयी दिल्ली , फरवरी 27 -- तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को सशस्त्र बलों का मनोबल बढाते हुए सुबह जैसलमेर वायु सेना स्टेशन से स्वदेशी लड़ाकू हेलीकॉप्टर 'प्रचंड' में ऐतिहासिक उड़ान भरकर इतिहास रचा। राष्ट्रपति की इस उडान ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण का भी संदेश दिया। वह 2023 में लड़ाकू विमान सुखोई और 2025 में राफेल में भी उड़ान भर चुकी हैं। इस उड़ान से शुक्रवार का दिन भारतीय सैन्य इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया।
श्रीमती मुर्मु की यह उड़ान एक मिशन का हिस्सा थी और इसमें वह ग्रुप कैप्टन नयन शांतिलाल बहुआ के साथ कॉकपिट में सह पायलट की भूमिका में नजर आई। ऐसा करने वाली वह देश की पहली राष्ट्रपति हैं। इस मिशन में दो हेलिकॉप्टर शामिल थे जिनमें से दूसरे हेलिकॉप्टर में स्वयं वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ग्रुप कैप्टन ए महेंद्र के साथ सवार थे। लगभग 25 मिनट के इस मिशन के दौरान हेलिकॉप्टरों ने गडिसर झील और जैसलमेर किले के ऊपर से उड़ान भरी तथा हेलिकॉप्टर ने एक टैंक को लक्ष्य बनाकर हमला किया। राष्ट्रपति ने हेलीकॉप्टर की कॉकपिट से सैनिकों को सलामी भी दी।
राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर अपना अनुभव भी साझा करते हुए लिखा, " प्रचंड हेलिकॉप्टर आत्मनिर्भरता का एक प्रबल प्रतीक है। इस समय मैं प्रसिद्ध जैसलमेर किले के ऊपर उड़ान भर रही हूँ। मुझे देश के वीर वायु सैनिकों पर अत्यंत गर्व है"।
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