मुरैना , मार्च 25 -- मध्यप्रदेश के मुरैना जिले स्थित राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र से रेत माफिया द्वारा किए जाने वाले अवैध रेत खनन के बीच दो दिन पहले कथित तौर पर खनन माफिया के लोगों द्वारा पुलिस कर्मचारियों पर किए गए हमले के बाद से जिले में इस मुद्दे ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है।
दिमनी पुलिस सूत्रों के अनुसार दो दिन पूर्व पुलिस वाहन को रेत माफिया के ट्रैक्टर ने टक्कर मार दी थी, जिससे पुलिस वाहन के क्षतिग्रस्त होने के साथ एक आरक्षक भी घायल हुआ है। इस घटना ने एक बार फिर इस क्षेत्र में रेत माफिया के दुस्साहस को सामने ला दिया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस क्षेत्र से प्रतिदिन लगभग एक सैंकड़ा से अधिक ट्रैक्टर ट्रालियों द्वारा उत्खनन कर परिवहन किया जा रहा है। इसी बीच पुलिस और प्रशासन के नुमांइदों पर भी माफिया के लोगों द्वारा हमले करने के लगातार मामले सामने आ रहे हैं।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 1978 में चंबल नदी पर स्थापित राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य में अवैध रेत उत्खनन को रोकने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने वन्यजीव (सरंक्षण) अधिनियम के तहत 2006 से निर्देश दिए हुए हैं। इसके बाद पिछले दिनों मार्च 2026 में न्यायालय ने इस मामले को पुनः संज्ञान में लेकर कहा कि चंबल नदी में अवैध खनन जलीय जीवों के लिए खतरा बन गया है। साथ ही न्यायालय ने इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को उत्तरदायी ठहराने की चेतावनी दी थी।
मुरैना में चंबल क्षेत्र में अवैध खनन (रेत माफिया) के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पिछले कुछ वर्षों में कई वन और पुलिस अधिकारियों को जान गंवानी पड़ी है। 2012 में आईपीएस नरेंद्र कुमार, 2018 में डिप्टी रेंजर सहित कई जवान ट्रैक्टर से कुचले गए या हमले में मारे गए। इसके अलावा, नियमित रूप से पुलिस वाहनों पर ट्रैक्टर चढ़ाने और हमले की घटनाएं होती रहती हैं, जिसमें कई आरक्षक घायल हुए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार दो दिन पहले ही दिमनी थाना क्षेत्र में पुलिस वाहन को रेत माफिया के ट्रैक्टर ने टक्कर मारी जिससे पुलिस वाहन के क्षतिग्रस्त होने के साथ एक आरक्षक घायल हुआ है।
रेत खनन के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले लोगों के अनुसार जिले में लगातार राजनीतिक संरक्षण के कारण भी अवैध खनन पर अंकुश लग पाना संभव नहीं हो पा रहा है। रेत माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई के दौरान भी गाड़ियों पर ट्रैक्टर चढ़ाने से बाज नहीं आ रहे।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में रेत उत्खनन पर मुख्य रूप से 2006 से ही प्रतिबंध लगा हुआ है। यह प्रतिबंध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत लगाया गया था। हाल ही में, न्यायालय ने मार्च 2026 में इस अभयारण्य में जारी अवैध रेत खनन पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कड़ा रुख अपनाया और तीन राज्यों (मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश ओर राजस्थान) को नोटिस जारी किए हैं।
जल्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार लगातार अवैध खनन के कारण घड़ियालों और लुप्तप्राय जलीय जीवों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ा है।
बताया जाता है कि माफिया के लोग पुलिस ओर प्रशासन द्वारा ट्रैक्टर ट्राली परिवहन करते पकड़े जाने पर राजसात की कार्रवाई से बचने के लिए जोखिम भरा निर्णय लेकर हमला करने से नहीं चूकते।
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