जगदलपुर , अक्टूबर 20 -- विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा के पारंपरिक आयोजन मुरिया दरबार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन को लेकर जारी निमंत्रण पत्र में आदिवासी जनप्रतिनिधियों और समाज प्रमुखों के नाम शामिल नहीं होने पर सवाल उठे हैं। छत्तीसगढ़ विधानसभा के उपनेता प्रतिपक्ष एवं बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल ने इस पर आपत्ति जताते हुए आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आदिवासी समाज के प्रमुखों की भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई है। उन्होंने राष्ट्रपति के समक्ष इंद्रावती नदी की बाढ़ से प्रभावित परिवारों की समस्याएं रखने तथा राहत एवं मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग भी उठाई है।

निमंत्रण पत्र में नाम शामिल नहीं होने के मुद्दे पर बस्तर संभाग के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को लेकर सवाल किए जा रहे हैं। इनमें कांकेर सांसद भोजराज नाग, बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, कोंटा विधायक कवासी लखमा, दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी, बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी, कोंडागांव विधायक लता उसेंडी, केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम, कांकेर विधायक आसाराम नेताम, भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मंडावी और अंतागढ़ विधायक विक्रम उसेंडी के नाम शामिल हैं। इसके साथ ही विभिन्न आदिवासी समाजों के प्रमुखों को आमंत्रित किए जाने और आयोजन की अतिथि सूची तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्टीकरण की मांग की जा रही है।

बस्तर क्षेत्र में इंद्रावती नदी की बाढ़ से प्रभावित परिवारों की समस्याओं को भी इस अवसर पर प्रमुखता से उठाने की मांग की जा रही है। बाढ़ के कारण कई गांवों में मकानों और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचने तथा किसानों की फसल प्रभावित होने की बात सामने आई है। प्रभावित परिवारों के सामने मकानों की मरम्मत, आजीविका बहाल करने और खेती-किसानी दोबारा शुरू करने की चुनौती है।

ऐसे में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मकानों की क्षति का उचित आकलन, फसल नुकसान का मुआवजा और किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई जा रही है। जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया जा रहा है कि वे राष्ट्रपति के समक्ष इन समस्याओं को रखें, ताकि प्रभावित लोगों को राहत दिलाने के लिए संबंधित स्तर पर आवश्यक पहल हो सके।

बाढ़ प्रभावित किसानों और परिवारों को राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता की राशि बढ़ाने की मांग भी उठाई जा रही है। प्रभावितों की जरूरतों को देखते हुए मकान क्षति, फसल नुकसान और पुनर्वास के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही फसल क्षति के आकलन और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाने की आवश्यकता बताई गई है।

मुरिया दरबार की आयोजन व्यवस्था, निमंत्रण पत्र जारी करने की प्रक्रिया और अतिथियों की सूची तैयार करने में संबंधित विभागों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इस संबंध में संस्कृति विभाग, जिला प्रशासन और बस्तर दशहरा समिति का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण है।

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