मुरादाबाद , अक्टूबर 31 -- उत्तर प्रदेश में युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को देखते हुए मुरादाबाद जिले में तंबाकू मुक्त युवा अभियान 4.0 के तहत 100 गांवों और 1100 विद्यालयों को तंबाकू मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके क्रियान्वयन के लिए शनिवार को अपर जिलाधिकारी (नगर) अंकुर श्रीवास्तव की अध्यक्षता में जिला स्तरीय बैठक हुई, जिसमें विभिन्न विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं और कोटपा तथा ई-सिगरेट प्रतिषेध कानून के सख्त अनुपालन के निर्देश दिए गए। बैठक में 100 गांवों को तंबाकू मुक्त बनाने की जिम्मेदारी पंचायती राज विभाग को दी गई, जबकि 1100 विद्यालयों का दायित्व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक को सौंपा गया। पुलिस विभाग को सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा) 2003 और ई-सिगरेट प्रतिषेध अधिनियम (पीईसीए) 2019 "प्रोहिबिशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट्स एक्ट, 2019" है,का प्रभावी अनुपालन कराने को कहा गया है। इसकी कमान पुलिस अधीक्षक (अपराध) रचना मिश्रा संभालेंगी और उन्हें सभी थानों में एक-एक पुलिस अधिकारी नामित करने के निर्देश भी दिए गए। खंड विकास अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों और चिकित्सा अधीक्षकों को अपने क्षेत्रों में तंबाकू नियंत्रण कानूनों का पालन कराने और उल्लंघन पर अधिकाधिक चालान करने को कहा गया।
कोटपा के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित है। साथ ही 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को तंबाकू उत्पाद बेचना और शिक्षण संस्थानों के सौ गज के दायरे में इनकी बिक्री करना भी अपराध है। पीईसीए 2019 में ई-सिगरेट के उत्पादन, आयात, बिक्री, भंडारण और विज्ञापन पर रोक है। पहली बार उल्लंघन पर एक वर्ष तक की कैद या एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है, जबकि दोबारा अपराध पर तीन वर्ष तक की सजा और पांच लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है।
स्कूलों पर इस अभियान का जोर इसलिए भी है कि तंबाकू की लत अक्सर किशोरावस्था में शुरू होती है। केंद्र सरकार के वैश्विक युवा तंबाकू सर्वेक्षण (2019) के अनुसार 13 से 15 वर्ष के करीब 8.5 प्रतिशत विद्यार्थी तंबाकू का उपयोग करते पाए गए थे। वैश्विक वयस्क तंबाकू सर्वेक्षण (2016-17) में देश के 28.6 प्रतिशत वयस्क तंबाकू उपयोगकर्ता थे, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 35.5 प्रतिशत दर्ज हुआ था।
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