मुरादाबाद, सितंबर 10 -- उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और अमरोहा जिलों में रामगंगा नदी का पानी रिहायशी क्षेत्रों में प्रवेश कर जाने से बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गये है। मुरादाबाद के भोजपुर क्षेत्र में गुरुवार को एक कच्चा मकान ढहने से एक महिला गंभीर रुप से घायल हो गयी। पुलिस ने बताया कि क्षेत्र के गांव अक्का भीकमपुर में आज सुबह जलभराव के कारण एक किसान का कच्चा मकान भरभराकर ढह गया और कमरे में मौजूद आलिबा खातून (26) मलबे के भारी ढेर के नीचे दब गईं। घटना के बाद परिजन और ग्रामीणों ने लगभग साढ़े तीन घंटे की कड़ी मशक्क्त के बाद महिला को मलबे से सकुशल निकाल लिया।

पीड़ित परिवार ने बताया कि लगातार हो रही बारिश से उनका आशियाना जमींदोज हो गया और घर का सारा सामान मलबे में तब्दील हो गया। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है, वहीं मुरादाबाद के मूंढापांडे क्षेत्र के लोधीपुर बासू, बिकनपुर और वीरपुर बरियार समेत आसपास के गांवों में रामगंगा का पानी घुसने से बाढ़ जैसे भयावह हालात पैदा हो गए हैं। बंधे के तेज कटान के चलते करीब 20 गांवों का संपर्क पूरी तरह कट गया है, जिससे ग्रामीणों को गतौरा ब्लॉक पहुंचने के लिए 30 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर काटना पड़ रहा है।

लोधीपुर बासू निवासी सावित्री जैसी कई बीमार महिलाओं को गांव में चिकित्सा सुविधा न होने के कारण इलाज के लिए दूसरे गांवों का रुख करना पड़ रहा है। कटान की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मुरादाबाद के कुंदरकी सीट से भाजपा विधायक रामवीर सिंह ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर लोधीपुर बासू और आसपास के गांवों में समय रहते ठोस कदम उठाने की मांग की है, ताकि भारी नुकसान को रोका जा सके। दूसरी ओर मंडल के अमरोहा जिले में भी बाढ़ और कटान से स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। गजरौला क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांवों में गंगा का पानी खेतों में भर जाने से खादर क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो चुका है। फसलें तबाह होने के कारण रोजगार का संकट पैदा हो गया है, जिसके चलते करीब चार सौ से अधिक ग्रामीण काम की तलाश में हरियाणा, पंजाब और राजस्थान पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। दारानगर के पुलिस चौकीदार मंगल सिंह के अनुसार गांव के लल्लू सिंह, धर्मेंद्र सिंह, भोले, दीपक, सोनू, रवि, जयप्रकाश और महेश कुमार समेत कई ग्रामीण फसल कटाई के लिए दूसरे राज्यों की ओर निकल गए हैं, जबकि तिगरी से भी दो दर्जन युवा दो दिन पहले मध्य प्रदेश चले गए।

कुदैनी निवासी जिला पंचायत सदस्य धर्मपाल सिंह खड़गवंशी ने बताया कि गंगा के टापू पर बसे करीब छह गांवों के चार सौ से अधिक कामगारों के पास अब कोई काम नहीं बचा है। मुरादपुर के पूर्व ग्राम पंचायत सदस्य सोनू भड़ाना ने खादर क्षेत्र में बंधे और सुरक्षा इंतजामों के अभाव को इस तबाही का मुख्य कारण ठहराया। हसनपुर क्षेत्र में गंगा के लगातार हो रहे कटान से संतोड़ा गांव का श्मशान घाट गंभीर खतरे की जद में आ गया है, जबकि नदी की तेज धार में उसका पक्का चबूतरा पहले ही समा चुका है। गजरौला गंगा नदी क्षेत्र के तिगरी घाट तथा दारानगर टापू पर बाढ़ के पानी में दो मगरमच्छों के तैरते दिखने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई है और नहर व गंगा किनारे आवागमन प्रभावित हो गया है।

मंडी धनौरा क्षेत्र में बुधवार को बिजनौर बैराज से 95,003 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बावजूद जलस्तर महज पांच सेंटीमीटर घटकर 200.65 मीटर दर्ज किया गया है, जिससे खादर क्षेत्र के गांवों में राहत की उम्मीद अभी दूर नजर आ रही है और परिषदीय स्कूल भी पानी उतरने के बाद बमुश्किल खोले जा सके हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित