मुरादाबाद , सितंबर 5 -- उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में प्रशासन और नगर निगम की समय रहते की गई कार्रवाई से शनिवार को एक संभावित बड़ा हादसा टल गया।
तहसील सदर क्षेत्र के जामा मस्जिद रोड स्थित जर्जर भवन को खतरनाक स्थिति में पाए जाने के बाद नगर निगम ने चार सितंबर को सील कर दिया था तथा पुलिस के सहयोग से आसपास का रास्ता भी बंद करा दिया था। तेज बारिश के बीच शनिवार को भवन अचानक भरभराकर गिर गया, लेकिन पहले से सील और प्रतिबंधित क्षेत्र होने के कारण कोई जनहानि नहीं हुई।
क्षेत्रीय लेखपाल की रिपोर्ट में उक्त भवन को नाले के किनारे अत्यंत जर्जर स्थिति में बताया गया था। संभावित खतरे को देखते हुए नगर निगम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए भवन को सील कर दिया। साथ ही थाना मुगलपुरा पुलिस को पत्र भेजकर सुरक्षा व्यवस्था और भवन के आसपास आवागमन रोकने का अनुरोध किया गया था।
नगर निगम की कार्रवाई के अगले ही दिन भवन के धराशायी होने से प्रशासन की आशंका सही साबित हुई। अधिकारियों के अनुसार, यदि भवन को समय रहते सील कर आसपास आवागमन नहीं रोका जाता तो यहां भी बड़ा हादसा हो सकता था।
गौरतलब है कि हाल ही में मुरादाबाद मंडल के अमरोहा जिले के औद्योगिक नगर गजरौला में जर्जर दुकान का छज्जा गिरने से दो मजदूरों की मौत हो गई थी। घटना के बाद गजरौला पालिका प्रशासन ने 13 जर्जर भवनों के स्वामियों को नोटिस जारी कर स्वयं ध्वस्तीकरण कराने को कहा है। ऐसा नहीं करने पर पालिका द्वारा कार्रवाई कर उसका खर्च भवन स्वामियों से वसूलने की चेतावनी दी गई है।
बारिश के मौसम में पुराने और जर्जर भवनों के गिरने का खतरा बढ़ गया है। हाल में हमसफर हॉल के पास जमीन धंसने से तीन मंजिला मकान के झुकने की घटना से भी क्षेत्र में चिंता पैदा हुई थी।
जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया और उपजिलाधिकारी (सदर) अभय सिंह के निर्देशन में हुई कार्रवाई की सराहना करते हुए रामलीला मैदान बचाओ संघर्ष मोर्चा से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर त्यागी ने कहा कि हादसों का इंतजार करने के बजाय पूरे मंडल में जर्जर मकानों, छज्जों और सार्वजनिक स्थलों का अग्रिम सर्वे कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय रहते सुरक्षा संबंधी कदम उठाकर संभावित हादसों में होने वाली जनहानि को रोका जा सकता है।
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