मुंबई , अक्टूबर 21 -- फ्रैंकलिन टेम्पलटन इंडिया म्यूचुअल फंड की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे माल और अन्य चीजों की लागत बढ़ने से कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ेगा और इसका असर सितंबर तिमाही के नतीजों में दिखाई दे सकता है।
भारतीय शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और डेट मार्केट की स्थिति पर फ्रैंकलिन टेम्पलटन इंडिया म्यूचुअल फंड की इक्विटी मार्केट स्नैपशॉट रिपोर्ट के अनुसार, भारत और अमेरिका की ब्याज दरों के बीच अंतर कम होने से विदेशी निवेश पर असर पड़ सकता है और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू शेयर बाजार में हाल की गिरावट के बाद शेयरों की कीमतें अब उचित स्तर पर आ गई हैं। वहीं, फिक्स्ड इनकम बाजार में यह उम्मीद बढ़ रही है कि मौद्रिक नीति पॉलिसी सख्त रह सकती है। इससे निवेशकों को कम अवधि वाले निवेश विकल्पों में नियमित ब्याज से कमाई करने वाली रणनीतियों और फंड मैनेजर की ओर से सक्रिय रूप से अवधि तय करने वाली रणनीतियों से फायदा मिल सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और अमेरिका की ब्याज दरों के बीच अंतर कम होने से विदेशी निवेश पर असर पड़ सकता है और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। महंगाई लगातार ऊंचे स्तर पर बने रहने के कारण दुनिया के कई केंद्रीय बैंकों ने एक बार फिर ब्याज दरें बढ़ाई हैं। अमेरिका के फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान, तीनों ने ब्याज दरों में प्रतिशत 0.25 अंक तक की बढ़ोतरी की है। इसके बाद सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला प्रतिफल कई साल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। महीने के अंत तक अमेरिका में 10 साल के सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल दर 5.3 प्रतिशत और भारत में 7.2 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया।।
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