कोच्चि , अक्टूबर 22 -- केरलम में कोच्चि के मुनंबम वक्फ भूमि विवाद फिर से गरमा गया है। प्रदर्शनकारी समितियों का आरोप है कि विवादित संपत्ति को 'उम्मीद' पोर्टल पर दर्ज करने के पीछे एक बड़ी साजिश है। उन्होंने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है, जिसमें तिरुवनंतपुरम स्थित केरलम सचिवालय तक विरोध प्रदर्शन ले जाने की योजना भी शामिल है।

वक्फ बोर्ड के नवनियुक्त अध्यक्ष एम.सी. मायन हाजी के इस बयान के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है कि मुनंबम की जमीन वक्फ बोर्ड की है। इस बयान से स्थानीय निवासियों और प्रदर्शनकारी समूहों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि वक्फ कानून में किए गए संशोधन से जमीन से जुड़ी उनकी समस्याओं का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। इसी विरोध प्रदर्शन के तहत, मुनंबम विरोध समिति गुरुवार शाम को कोच्चि के कालूर में वक्फ बोर्ड कार्यालय के सामने धरना देने की योजना है।

फादर जोशी मयट्टिल के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन होगा। मुनंबम भू-संरक्षण समिति ने आने वाले दिनों में एक बड़े स्तर पर विरोध मार्च निकालने का भी फैसला किया है। यह कार्यक्रम मुनंबम चर्च से शुरू होगा, जहाँ से प्रतिभागी मोमबत्तियाँ लेकर समुद्र तट पर स्थित 'मुनंबम गैप' तक जाएँगे और वहाँ प्रार्थना करेंगे।

राजस्व विभाग द्वारा निवासियों को अपनी संपत्तियों पर भूमि कर चुकाने की अनुमति दिए जाने के बाद, यह आंदोलन लगभग एक साल के लिए अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। हालाँकि, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के हालिया बयान ने इस विवाद को फिर से हवा दे दी है, जिससे निवासियों के बीच अपनी ज़मीन की स्थिति और स्थायी समाधान की संभावनाओं को लेकर उनके माथे पर चिंता की लकीरें फिर से खिंच गई हैं।

मुनंबम भू-संरक्षण समिति के अध्यक्ष जोसेफ रॉकी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विवादित संपत्ति को 'उम्मीद' पोर्टल पर पंजीकृत होने से रोकने के लिए हस्तक्षेप करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि वक्फ कानून में संशोधन से प्रभावित परिवारों को कोई राहत नहीं मिली है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका समाधान तभी संभव है, जब राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय में लंबित इस मामले में अपना रुख बदले।

मुनंबम प्रदर्शन समिति के अध्यक्ष फिलिप जोसेफ ने आरोप लगाया कि पोर्टल पर संपत्ति का पंजीकरण एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि आम निवासियों को धोखा दिया गया है, जिसके चलते उनके पास अपना आंदोलन फिर से शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

समिति इस अभियान को मुनामबम से आगे बढ़ाने और तिरुवनंतपुरम में सचिवालय के पास विरोध-प्रदर्शन करने की योजना बना रही है। इससे यह विवाद एक बार फिर केरलम की राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।

इन ताजा घटनाक्रमों ने संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) को भी राजनीतिक रूप से मुश्किल में डाल दिया है। मुस्लिम लीग के उपाध्यक्ष मायन हाजी ने मुनामबम की जमीन के मालिकाना हक पर जो रुख अपनाया है, वह यूडीएफ नेताओं (जिनमें मुख्यमंत्री वीडी सतीसन भी शामिल हैं) के पहले के बयानों से मेल नहीं खाता।

इस बीच पिछले आंदोलन के दौरान मतभेद पैदा होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थन से बनी एक अलग विरोध समिति भी फिर से सक्रिय हो गई है। आंदोलन के पिछले चरण में भाजपा ने इस विवाद का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की थी। उसने सत्ताधारी माकपा के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ दोनों को चुनौती दी थी।

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