नैनीताल , सितंबर 24 -- उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के वर्ष 1951-52 के बाढ़ पीड़ितों का मामला उत्तराखंड उच्च न्यायालय पहुंच गया है। इस मामले को 12 लोगों की ओर से चुनौती दी गई है। उच्च न्यायालय ने हरिद्वार के जिलाधिकारी को प्रत्यावेदन पर विचार करने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ता राम बहादुर एवं अन्य की ओर से दायर याचिका पर गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ में सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को जमीन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने 10 अप्रैल, 1952 को अधिसूचना जारी कर हरिद्वार जिले के पाथरी वन क्षेत्र में भूमि आवंटित करने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद पाथरी वन क्षेत्र की भूमि को डी-नोटिफाई भी किया गया।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि डी-नोटिफाई की गई भूमि में से उन्हें अब तक भूमि आवंटित नहीं की गई जबकि समान परिस्थितियों वाले अन्य लोगों को वन भूमि आवंटित की जा चुकी है।

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