चंडीगढ़ , अक्टूबर 09 -- अकाली दल 'वारिस पंजाब दे' के वरिष्ठ नेता एवं दाखा से विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग के कामकाज और विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों से देश में राजनीतिक अविश्वास का माहौल बन रहा है।

श्री अयाली ने शुक्रवार को जारी बयान में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं और पात्र नागरिकों के मतदान अधिकारों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाये रखने के लिए निर्वाचन आयोग की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार, 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रारूप मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाये गये हैं। उन्होंने निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर संधू और विवेक जोशी की कुछ फैसलों तथा प्रशासनिक कार्रवाइयों पर कथित आपत्तियों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में अनियमितताओं से संबंधित याचिका की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने फॉर्म-6 के संशोधित प्रारूपों को मंजूरी देने से इनकार करने संबंधी टिप्पणी की थी और यह जांचने की बात कही थी कि फॉर्म में बदलाव किसने और किन आधारों पर किए। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को इसके विपरीत दावा किया था कि एसआईआर के दौरान फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा को उच्चतम न्यायालय की मंजूरी मिली थी। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 324(5) का हवाला देते हुए ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की और उनके आचरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता से जुड़े सवालों पर निर्वाचन आयोग को जवाब देना चाहिए।

अकाली दल 'वारिस पंजाब दे' के पंजीकरण में कथित देरी का मुद्दा उठाते हुए श्री अयाली ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में राजनीतिक कारणों से बाधाएं डाली गईं। उन्होंने निर्वाचन आयोग की उस दलील को भी अप्रासंगिक बताया, जिसमें पार्टी के पंजीकरण को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया था। उन्होंने आयोग पर भाजपा के राजनीतिक हितों के अनुरूप काम करने का आरोप भी लगाया।

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