नैनीताल , जुलाई 17 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) की एक टेंडर प्रक्रिया से जुड़े मामले में न्यायालय के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने पर मुख्य अभियंता संजय कुमार पाठक को अवमानना का दोषी करार दिया है।
न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने स्पष्ट कहा कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने यह आदेश 15 जुलाई को सुनाया लेकिन आदेश की प्रति आज मिल पायी।
मामला मैसर्स राम कृष्ण जयरा बनाम राज्य सरकार एवं अन्य से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की फर्म को तकनीकी मूल्यांकन में अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इसके खिलाफ दायर रिट याचिका पर 26 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए विभाग को निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता की वित्तीय बोली (फाइनेंशियल बिड) भी खोली जाए और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाए।
आरोप है कि इसके बावजूद विभाग ने यह कहते हुए पूरी टेंडर प्रक्रिया रोक दी कि अन्य बोलीदाताओं ने अपनी निविदा वैधता अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया है और अब केवल एक ही बोलीदाता बचा है। अदालत ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि यह स्थिति स्वयं विभाग की बनाई हुई है और इसका उद्देश्य न्यायालय के आदेश को निष्प्रभावी करना है।
अदालत ने कहा कि यदि आदेश से असहमति थी तो संबंधित पक्ष को उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में चुनौती देनी चाहिए थी न कि आदेश की अवहेलना करनी चाहिए।
अदालत ने मुख्य अभियंता को न्यायालय के आदेश की जानबूझकर अवहेलना का दोषी मानते हुए निर्देश दिया कि 26 फरवरी 2026 के आदेश का 10 दिन के भीतर पूर्ण अनुपालन किया जाए और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि निर्धारित अवधि में आदेश का अनुपालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारी को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत सजा प्राप्त करने के लिए तैयार रहना होगा। मामले की अगली सुनवाई आगामी 27 जुलाई को निर्धारित की गई है।
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