रांची , जुलाई 30 -- झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अनुसूचित जनजाति (एसटी), अनुसूचित जाति (एससी), पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) एवं अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र-छात्राओं के लिए संचालित प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं में झारखंड को अधिक केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।
मुख्यमंत्री श्री सोरेन ने अपने पत्र में कहा कि भारत सरकार द्वारा कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान करने की दिशा में संचालित छात्रवृत्ति योजनाएं सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में शिक्षा और समान अवसरों को बढ़ावा देने के लिए लिए गए नीतिगत निर्णय समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड सरकार सामाजिक समानता और शैक्षणिक सशक्तिकरण के लक्ष्य को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है तथा राज्य में शिक्षा को प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
श्री सोरेन ने पत्र में झारखंड की विशेष परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने छात्रवृत्ति निर्धारण में जाति या समुदाय के बजाय विद्यार्थियों के माता-पिता अथवा अभिभावक की वार्षिक आय को आधार बनाया है, जो पारदर्शिता, समानता और सामाजिक न्याय की भावना के अनुरूप है। इसके बावजूद झारखंड में भौगोलिक कठिनाइयों, सीमित संसाधनों और बड़ी संख्या में वंचित समुदायों के कारण विद्यार्थियों तक अपेक्षित सहायता पहुंचाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
उन्होंने केंद्र सरकार से प्राप्त छात्रवृत्ति राशि का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए राज्य ने 45.91 करोड़ रुपये की मांग की थी, जबकि केंद्र सरकार से केवल 3.95 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए। वहीं, वित्तीय वर्ष 2024-25 में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए राज्य ने 353 करोड़ रुपये की मांग की थी, जिसके विरुद्ध केंद्र सरकार ने मात्र 33.57 करोड़ रुपये जारी किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व के वर्षों में भी राज्य को मांग की तुलना में काफी कम केंद्रीय सहायता प्राप्त हुई है। ऐसे में आर्थिक रूप से पिछड़े और विकासशील राज्यों की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए छात्रवृत्ति योजनाओं, विशेषकर पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति में केंद्रीय अंशदान बढ़ाने पर नीतिगत निर्णय लिया जाना चाहिए।
श्री सोरेन ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि इस संबंध में सकारात्मक निर्णय लेकर झारखंड जैसे राज्यों के लाखों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए, ताकि शिक्षा में समान अवसर और सामाजिक न्याय के उद्देश्य को प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सके।
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