अमरोहा , जून 07 -- उत्तर प्रदेश के अमरोहा में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 800 बेटियों के होंगे हाथ पीले। फर्जीवाड़ा रोकने को मंडप में होगी बायोमेट्रिक जांच।
जिला समाज कल्याण अधिकारी पंखुरी जैन ने रविवार को बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना' के तहत इस वर्ष अमरोहा जिले में 800 गरीब कन्याओं के विवाह का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए समाज कल्याण विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। शासन से प्राप्त इस लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए विभाग ने हर तीन महीने में 200 शादियों का खाका तैयार किया है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों के जोड़े पूरी आस्था और रीति-रिवाज के साथ हिस्सा लेंगे। फिलहाल इस वर्ष के पहले आयोजन के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है, जिसके पास होते ही भव्य स्तर पर सामूहिक विवाह के कार्यक्रम शुरू कर दिए जाएंगे। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इस योजना का लाभ उठाने में ग्रामीण क्षेत्र के लोग सबसे आगे हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों के लोग सामूहिक विवाह के बजाय निजी तौर पर शादियां करना ज्यादा पसंद करते हैं।
उन्होंने बताया कि योजना के तहत पारदर्शी तरीके से प्रति जोड़े पर कुल एक लाख रुपये की धनराशि खर्च की जाएगी, जिसमें से 15 हजार रुपये आयोजन जैसे टेंट, भोजन, पंडित या मौलवी और सजावट पर खर्च होते हैं, जबकि 25 हजार रुपये का गृहस्थी का सामान जोड़ों को उपहार स्वरूप दिया जाता है। इसके अलावा मुख्य राशि के रूप में 60 हजार रुपये सीधे वधु के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं।
विवाह संपन्न होने के बाद लाभार्थियों की सूची जिलाधिकारी द्वारा स्वीकृत कर विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाती है, जिससे महज एक से दो सप्ताह के भीतर धनराशि सुरक्षित तरीके से लड़की के खाते में पहुंच जाती है। योजना का लाभ लेने के लिए लड़की की उम्र 18 वर्ष और लड़के की उम्र 21 वर्ष से अधिक होनी अनिवार्य है, साथ ही यह दोनों का पहला विवाह होना चाहिए और लाभार्थी परिवार की वार्षिक आय तीन लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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