वाराणसी , जून 13 -- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने काशी दौरे के दूसरे दिन शनिवार सुबह सर्किट हाउस में सेंट्रल बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान कचहरी को जिला मुख्यालय से स्थानांतरित कर सेंट्रल जेल के पास विस्तारित करने पर विस्तृत मंथन हुआ।

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम प्रकाश गौतम ने बताया कि कचहरी के विस्तारीकरण और स्थानांतरण को लेकर लंबे समय से प्रयास चल रहे थे। अधिवक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे बैठने की व्यवस्था और भीड़ की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। वादियों की भीड़ भी बढ़ती जा रही है। साथ ही बगल में सर्किट हाउस होने के कारण अक्सर सड़क जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

उन्होंने बताया ," प्रदेश के 8-10 जिलों में इंटीग्रेटेड कोर्ट कैंपस बनाए जा रहे हैं, जहां एक ही छत के नीचे सभी न्यायालय संचालित होंगे। हमने मुख्यमंत्री से समय मांगा था, जो उन्होंने दिया। लगभग 15 मिनट तक बंद कमरे में चर्चा हुई। इसमें जिलाधिकारी को भी बुलाया गया था। मुख्यमंत्री ने पूछा कि क्या कोई जगह चिह्नित की गई है। हम लोगों ने बताया कि सेंट्रल जेल के पास 25 एकड़ भूमि उपलब्ध है, जहां वर्तमान में खेती होती है। यदि यह भूमि उपलब्ध हो जाए तो बड़ी सुविधा हो जाएगी।"मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि यदि बार एसोसिएशन इसकी मांग कर रहा है तो उस भूमि का पूरा ब्यौरा शासन को उपलब्ध कराया जाए, ताकि जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू किया जा सके।

प्रेम प्रकाश ने आगे बताया कि हमने यह भी मांग रखी कि कलेक्टरेट कोर्ट भी उसी परिसर में रहे, क्योंकि कई अधिवक्ता दोनों जगह काम करते हैं। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बिल्कुल, कलेक्टरेट कोर्ट भी वहीं बनेगा। यह इंटीग्रेटेड कोर्ट कैंपस की परिभाषा में आता है। एक ही छत के नीचे सभी न्यायालय होंगे। यह बनारस के अधिवक्ता समाज की बड़ी जीत है। मुझे विश्वास है कि बहुत जल्द ही यहां निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

श्री प्रेम प्रकाश ने कहा कि काशी में बनने वाले इंटीग्रेटेड कोर्ट कैंपस में जजों के चैंबर, कोर्ट रूम और उनके आवास भी उसी 25 एकड़ परिसर के अंदर होंगे। अधिवक्ताओं के लिए पर्याप्त संख्या में चैंबर बनाए जाएंगे। हमने 10,000 चैंबर की मांग की है। यदि 8,000 चैंबर भी मिल जाते हैं तो एक चैंबर में दो अधिवक्ता बैठ सकेंगे, यानी कुल 16,000 अधिवक्ताओं की क्षमता होगी। वर्तमान में जिले में करीब 10,000 अधिवक्ता हैं, जिसके बाद भी कई चैंबर खाली रहेंगे।

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