भुवनेश्वर , अगस्त 15 -- ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने ओडिशा राज्य सिविल सेवा परीक्षा के लिए छह अवसरों की मौजूदा सीमा को खत्म करने की घोषणा की। इससे उम्मीदवार तय अधिकतम उम्र सीमा तक परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

श्री माझी ने शनिवार को यहां गांधी मार्ग पर राज्य-स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में तिरंगा फहराते हुए सरकारी कर्मचारियों की मौत के बाद अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने से जुड़े कुछ नियमों में ढील देने की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा से जुड़ी एक बड़ी घोषणा में कहा कि ओडिशा ने पहली बार कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए मिड-डे मील (दोपहर का भोजन) की व्यवस्था की है। कक्षा 9 और 10 के छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें भी दी जाएंगी; इससे उस मौजूदा व्यवस्था का विस्तार होगा जिसके तहत केवल कक्षा 8 तक ही मुफ्त पाठ्यपुस्तकें दी जाती थीं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के लिए सरकार ने दूर-दराज के जिलों में 18 नए सरकारी कॉलेज और चार नए विश्वविद्यालय स्थापित करने का फैसला किया है।

श्री माझी ने कहा कि नागरिकों को बुनियादी सुविधाएँ देना हर सरकार की बुनियादी ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यह चिंता की बात है कि आज़ादी के आठ दशक बाद भी ओडिशा के कई गाँवों में सड़कें, बिजली और पीने का पानी नहीं पहुँचा है। इस समस्या को हल करने के लिए, राज्य सरकार ने 'मिशन पावर' प्रोग्राम शुरू किया है, जिसके तहत सरकार ने 2027 के आखिर तक हर गाँव में ये बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।

श्री माझी ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ आम परिवारों की सबसे बड़ी ज़रूरतों में से हैं, क्योंकि परिवार की कमाई का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं पर खर्च होता है। उन्होंने बताया कि ओडिशा देश का पहला राज्य बन गया है जिसने केजी से लेकर पीजी तक शिक्षा पूरी तरह मुफ़्त कर दी है।

उन्होंने कहा कि इस पहल के तहत सभी सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के साथ-साथ सरकार से मदद पाने वाले संस्थानों में भी शिशु वाटिका से लेकर पोस्ट-ग्रेजुएट लेवल तक शिक्षा पूरी तरह शुल्क मुक्त कर दी गयी है। अस्सीवें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर श्री माझी ने ओडिशा के लोगों और देश-विदेश में रहने वाले हर भारतीय को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने उन स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने देश की आज़ादी की लड़ाई में बहुत बड़ा बलिदान दिया था। इनमें पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, बाल गंगाधर तिलक, वीर सावरकर, शहीद भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, डॉ. बी.आर. अंबेडकर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लाल बहादुर शास्त्री और मौलाना आज़ाद के अलावा लाखों अन्य स्वतंत्रता सेनानी शामिल थे। उन्होंने कहा कि ओडिशा के बहादुर बेटे-बेटियों ने भी आज़ादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी और राज्य के नेताओं के बलिदान और संघर्ष ने ओडिशा को राष्ट्रीय आंदोलन की मुख्यधारा में शामिल किया था।

ओडिशा की प्रमुख हस्तियों को याद करते हुए श्री माझी ने उत्कलमणि पंडित गोपबंधु दास, उत्कल गौरव मधुसूदन दास, नबकृष्ण चौधरी, गोपबंधु चौधरी, शहीद लक्ष्मण नायक, वीर सुरेंद्र साई, शहीद माधो सिंह, चक्र बिसोई, रेंडो माझी, मां रमादेवी, मां मालती चौधरी, डॉ. हरेकृष्ण महताब, बीजू पटनायक, मां पारबती गिरी और सरला देवी को श्रद्धांजलि दी।

उन्होंने बक्सी जगबंधु और जयी राजगुरु जैसे महान देशभक्तों और स्वतंत्रता सेनानियों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ ऐतिहासिक विद्रोह का नेतृत्व किया।

श्री माझी ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास ओडिशा के लोगों के आंदोलनों के बिना अधूरा होगा। उन्होंने कहा, रक्ततीर्थ एरम आंदोलन, घुमसर विद्रोह, प्रजामंडल आंदोलन, कंध विद्रोह, संबलपुर विद्रोह, क्योंझर का भुइयां विद्रोह और कोरापुट में आदिवासी विद्रोह ने स्वतंत्रता संग्राम को और मजबूत और तीव्र किया है।

उन्होंने कहा, "इन सभी आदिवासी आंदोलन के नेताओं की बहादुरी और बलिदान इतिहास में हमेशा सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेंगे।"श्री माझी ने पिछले दो सालों में अपनी सरकार की उपलब्धियों का ज़िक्र करते हुए दावा किया कि 21 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जबकि 10 लाख करोड़ रुपये के 453 औद्योगिक प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी गई है। उन्होंने बताया कि इनमें से सरकार ने अब तक 3.5 लाख करोड़ रुपये के 152 प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन या शिलान्यास किया है, जिससे लगभग 2.5 लाख युवाओं (पुरुषों और महिलाओं) के लिए रोज़गार के अवसर पैदा हुए हैं।

श्री माझी ने कहा कि ओडिशा में "दूसरी औद्योगिक क्रांति" हो रही है और अब उद्योग सिर्फ़ कुछ ज़िलों या चुनिंदा इलाकों में ही नहीं, बल्कि राज्य के सभी ज़िलों में लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन पहलों से लंबे समय से चली आ रही क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने और ओडिशा में ही रोज़गार के पर्याप्त अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी, ताकि लोगों को काम की तलाश में दूर-दराज़ के इलाकों में पलायन न करना पड़े।

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