भोपाल , सितंबर 04 -- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन धर्म, कर्म, ज्ञान, भक्ति और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े पावन स्थलों और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने तथा महर्षि सांदीपनि की ज्ञान परंपरा से प्रेरित सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से भावी पीढ़ी को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और संस्कारयुक्त शिक्षा देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने भोपाल के जहांगीराबाद स्थित बरखेड़ी के श्री राधा-कृष्ण मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना और आरती की। इस अवसर पर उन्होंने बाल कन्हैया (लड्डू गोपाल) को अपने सिर पर धारण कर मंदिर में प्रवेश किया। मुख्यमंत्री ने बरखेड़ी में जन्माष्टमी पर आयोजित होने वाले झांकी समारोह में भी सहभागिता की और श्रद्धालुओं को पर्व की शुभकामनाएं दीं।
वही मुख्यमंत्री निवास में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आख्यान पर्व में उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल का जलाभिषेक कर विधिवत पूजन किया। इसके बाद माखन-मिश्री से भरी मटकी फोड़कर राधारानी और बाल गोपाल की वेशभूषा में आए बच्चों को माखन खिलाया तथा उपहार देकर उनका दुलार किया।
डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के नाम से भारत की पहचान दुनियाभर में बनी है। भगवान श्रीकृष्ण ने कठिन परिस्थितियों में धैर्य और संयम के साथ आगे बढ़ने तथा कष्टों से मार्ग निकालने की प्रेरणा दी। उन्होंने उज्जैन स्थित महर्षि सांदीपनि आश्रम में श्रीकृष्ण द्वारा 64 कलाओं और 14 विद्याओं की शिक्षा प्राप्त करने तथा सुदामा के साथ उनकी मित्रता के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन शिक्षा के महत्व को भी प्रतिपादित करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण से जुड़े स्थानों को भव्य तीर्थ के रूप में विकसित करने के लिए संकल्पित है। श्रीकृष्ण पाथेय के अंतर्गत उज्जैन का सांदीपनि आश्रम, जानापाव, महिदपुर सहित अन्य स्थलों का विकास किया जा रहा है। इसी प्रकार संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से चित्रकूट धाम को भी विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति के गौरवशाली अतीत से दुनिया को परिचित कराने के लिए प्रदेश में पर्व और त्योहार व्यापक स्तर पर मनाए जा रहे हैं।
श्रीकृष्ण आख्यान के दौरान प्रदेश के विभिन्न कला समूहों ने श्रीकृष्ण जन्म, उनकी लीलाओं, कालिया नाग मर्दन, गोवर्धन लीला, कंस वध और गीता उपदेश पर आधारित नृत्य-नाटिकाओं की प्रस्तुतियां दीं। जबलपुर के जुगलकिशोर नामदेव और उनके साथी कलाकारों ने मयूर नृत्य तथा कृष्ण भक्ति पर आधारित भजनों की प्रस्तुति दी। उज्जैन से आए कलाकारों ने भारत सिंह पालीवाल के निर्देशन में मलखंभ के आकर्षक करतब प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री ने मलखंभ खिलाड़ियों के साथ फोटो खिंचवाकर उनका उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर उन्हें वैदिक घड़ी भी भेंट की गई।
मुख्यमंत्री ने सांदीपनि आश्रम और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण ने गुरु दक्षिणा के रूप में महर्षि सांदीपनि के पुत्र को वापस लाने का संकल्प लिया था। उन्होंने जानापाव में भगवान परशुराम से सुदर्शन चक्र प्राप्त करने और समुद्र से पांचजन्य शंख मिलने का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुदर्शन चक्र और पांचजन्य शंख भगवान श्रीकृष्ण के चतुर्भुज स्वरूप की शोभा हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व को अच्छाई और विश्व बंधुत्व का संदेश देती है। भारत आर्थिक रूप से भी सशक्त हो रहा है और सरकार नागरिकों के हितों की रक्षा तथा देश के विदेशी संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर, विधायक रामेश्वर शर्मा, पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, वरिष्ठ समाजसेवी रघुनंदन शर्मा, महापौर मालती राय, रविन्द्र यति, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी सहित अनेक संत, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
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