भोपाल , जुलाई 29 -- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश में बाघ संरक्षण का अग्रणी राज्य है और आगामी बाघ गणना में प्रदेश में बाघों की संख्या लगभग एक हजार तक पहुंचने की संभावना है।

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2022 की गणना के अनुसार प्रदेश में 785 बाघ थे। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और नदियों में घड़ियाल संरक्षण के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि प्रदेश में छोड़े गए घड़ियाल सुरक्षित रह सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला उत्सव है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति प्रकृति के सम्मान और संरक्षण की रही है तथा विश्वगुरु की अवधारणा भी इसी पर आधारित है।

उन्होंने ओरछा स्थित माता महालक्ष्मी मंदिर की भव्यता की सराहना करते हुए कहा कि सरकार के सभी विभाग महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वन विभाग के साथ कार्य करना उन्हें विशेष संतोष देता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार अन्य राज्यों के साथ वन्यजीवों के आदान-प्रदान की पहल भी कर रही है तथा हाथियों से होने वाली जनहानि रोकने के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम मिले हैं।

कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) शुभरंजन सेन ने कहा कि बाघों का संरक्षण प्रकृति और मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जंगल वही है, जहां बाघ, बाघिन और उनके शावक सुरक्षित हों।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण के लिए उपलब्ध कराए गए नए वाहनों का लोकार्पण किया, विभागीय प्रदर्शनी का अवलोकन किया, प्रकाशनों का विमोचन तथा वन्यजीव प्रबंधन पर आधारित वृत्तचित्रों के टीजर जारी किए।

उन्होंने राज्य वन्य प्राणी बोर्ड के पद्मश्री सम्मानित सदस्यों, वन सुरक्षा समितियों, ईको विकास समितियों, ग्राम वन समितियों तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन कर्मियों को सम्मानित भी किया। समारोह में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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