उज्जैन , अगस्त 03 -- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश शासन के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता पारस चंद्र जैन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। निधन का समाचार मिलते ही मुख्यमंत्री भोपाल से उज्जैन पहुंचे और पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शोक संतप्त परिजनों से भेंट कर उन्हें सांत्वना भी दी।

उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र का छह बार प्रतिनिधित्व करने वाले पूर्व विधायक पारस चंद्र जैन का सोमवार को इंदौर के एक निजी अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार उज्जैन के शिप्रा तट स्थित चक्रतीर्थ घाट पर राजकीय सम्मान के साथ किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पारस चंद्र जैन वरिष्ठ, लोकप्रिय और जनप्रिय नेता थे। उन्होंने राजनीति के साथ-साथ सामाजिक, धार्मिक और जनसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने कहा कि एक उत्कृष्ट पहलवान और सर्वोदयी व्यक्तित्व के रूप में वे सदैव स्मरण किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बाबा महाकाल से दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

उन्होंने कहा कि जैन ने अपने सार्वजनिक जीवन में स्कूल शिक्षा, ऊर्जा, वन तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण विभागों का सफलतापूर्वक दायित्व निभाया और प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

अंतिम संस्कार में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सत्यनारायण जटिया, कांग्रेस विधायक महेश परमार, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, मंत्री गौतम टेटवाल, मंत्री इंदर सिंह परमार, महापौर मुकेश टटवाल, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

पारस चंद्र जैन ने जीवनकाल में मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की गई, जिससे दो नेत्रहीन व्यक्तियों को दृष्टि मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

उज्जैन में जन्मे जैन ने विक्रम विश्वविद्यालय से बी.कॉम. की शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा पूरी करने के बाद वे पारिवारिक अनाज व्यवसाय से जुड़े और बाद में सक्रिय राजनीति में आए। वर्ष 2005 से 2013 तक उन्होंने राज्य मंत्री के रूप में वन, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभागों का दायित्व संभाला। वर्ष 2013 में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाकर स्कूल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई, जबकि वर्ष 2016 में ऊर्जा तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग का प्रभार सौंपा गया।

धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी विशेष रुचि थी। उज्जैन सिंहस्थ की तैयारियों में उन्होंने केंद्रीय समिति के सदस्य के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई। व्यायाम, योग और खेलों के प्रति उनके लगाव के कारण वे "पारस पहलवान" के नाम से भी व्यापक रूप से प्रसिद्ध थे। उनके परिवार में पत्नी अंगूरबाला जैन, पुत्री स्वाति और पुत्र संदेश हैं।

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