पटना, जून 19 -- ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर संपर्कता सुनिश्चित करने और संपर्क-विहीन बसावटों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना (अवशेष) का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों, टोलों और बसावटों तक बारहमासी सड़क सम्पर्कता सुनिश्चित की जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन, आर्थिक गतिविधियों और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना (अवशेष) के अंतर्गत राज्य के सभी 38 जिलों में कुल 6,078 ग्रामीण पथों के निर्माण हेतु प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनकी कुल लंबाई 8,035 किलोमीटर है। इस दिशा में अब तक 2,321 ग्रामीण पथों का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। जिससे राज्यभर में 2,688 किलोमीटर लंबी पक्की सड़कें बनकर तैयार हो चुकी हैं, जबकि शेष परियोजनाओं पर भी तीव्र गति से कार्य जारी है।
इस योजना के अंतर्गत कई जिलों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। इस दिशा में पूर्वी चंपारण जिले में सर्वाधिक 272 ग्रामीण पथों का निर्माण कर 382 किलोमीटर सड़क संपर्कता सुनिश्चित की गई है। इसके साथ-साथ कैमूर जिले में 188 किलोमीटर, गया में 171 किलोमीटर, औरंगाबाद में 165 किलोमीटर, बांका में 153 किलोमीटर तथा जमुई में 133 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। वहीं उत्तर बिहार के जिलों में भी उल्लेखनीय प्रगति की गई है, जहां सुपौल में 103 किलोमीटर तथा मधुबनी में 107 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण कर संपर्कता को सुदृढ़ किया गया है।
मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना (अवशेष) के तहत हो रहे इन कार्यों का प्रत्यक्ष लाभ लाखों ग्रामीण परिवारों को मिल रहा है। इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली है। बेहतर सड़क सम्पर्कता के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था मजबूत हुई है और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं व्यापारिक अवसरों का भी विस्तार हुआ है।
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