पटना,11फरवरी (वार्ता) बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ग्रामीण पेय जल निश्चय योजना से जुड़ी समस्याओं के निदान के लिए वह स्वयं विभिन्न सम्बद्ध विभागों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।

अध्यक्ष श्री कुमार ने यह निर्णय बिहार विधानसभा में आज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक मिथिलेश तिवारी, विनय कुमार चौधरी और पांच अन्य के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर स्वजल जवाब के दौरान लिया।

श्री तिवारी ने सदन में कहा कि देश को नई दिशा दिखाने वाली और बिहार के हर घर मे शुद्ध पेयजल सुनिश्चित करने की गारंटी देने वाली मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल योजना बिहार में खस्ताहाल स्थिति में है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के 8053 गांवों में 67053 योजनाओं को क्रियान्वित किया गया था, लेकिन ज्यादातर स्थानों पर पेयजल के लिए लगाए गए पम्प काम नही कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोक स्वास्थ्य एवं अभियंत्रण (पीएचडी) विभाग को रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद भी यह योजना ग्रामीण इलाकों में ठीक ढंग से काम नही कर रही है। उन्होंने कहा कि जहां पम्प काम कर रहे हैं, वहां पाइप फटा हुआ है और पानी को जहां पहुंचना है वहां नही पहुंच पाता है।

श्री तिवारी ने कहा कि इतना ही नही बहुत से जगहों पर पंपों को चलाने के लिए आवश्यक बिजली का भुगतान नही हुआ है और कल पुर्जों के खराब होने पर उसके रख रखाव में भी कमी देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े नेटवर्क के रख रखाव के लिए सिर्फ 22.50 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं, जो बहुत कम हैं।

श्री तिवारी के सवाल का जवाब देते हुए लोक स्वास्थ्य एवं अभियंत्रण विभाग के मंत्री संजय कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश के नगरों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी नगर आवास एवं विकास विभाग की है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रो में लोक स्वास्थ्य और अभियंत्रण तथा पंचायती राज्य विभाग इसे संचालित कर रहे हैं। मंत्री ने माना कि पम्पों को लगाते समय नियमों का पालन नही किया गया है और जहां चार फीट गहरे स्थान पर इसे लगाना है वहां स्थानीय मुखिया ने इसे आधे से दो फुट गहराई पर लगा दिया है।

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