इम्फाल , अगस्त 07 -- मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने शुक्रवार को प्रदेशवासियों से अपील की कि वे बंद, नाकेबंदी और विरोध-प्रदर्शन के ऐसे तरीकों से बचें जिनसे रोज़मर्रा की गतिविधियां बाधित होती हैं और नागरिकों की अर्थव्यवस्था और आजीविका पर बुरा असर पड़ता है।

श्री खेमचंद सिंह ने इम्फाल के क्लासिक ग्रांडे स्थित इंपीरियल हॉल में मणिपुर की जनसंख्या प्रोफ़ाइल पर दो दिवसीय सलाह-मशविरे की बैठक और सेमिनार का उद्घाटन करते हुए यह अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजमार्ग पर चल रहे बंद, नाकेबंदी और विरोध-प्रदर्शन के अन्य तरीकों ने मणिपुर और देश दोनों की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है, और ऐसी रुकावटों का सबसे ज़्यादा असर दिहाड़ी मज़दूरों पर पड़ा है। उन्होंने राज्य में ज़रूरी सामान पहुँचाते समय राष्ट्रीय राजमार्ग पर फँसे ट्रक चालकों को होने वाली दिक्कतों का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आम जनता के हित वाले उपायों और पहलों का समर्थन करने के लिए तैयार है। उन्होंने विचार-विमर्श पर भरोसा जताते हुए कहा कि सेमिनार से निकलने वाले सुझाव और प्रस्ताव लोगों की भलाई में योगदान देने वाले होने चाहिए। उन्होंने ज़ोर दिया कि कोई भी सिफ़ारिश या उपाय भारत के संविधान के प्रावधानों के दायरे में ही होना चाहिए।

गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजम ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि मणिपुर सरकार ने केंद्र सरकार को पहले ही बता दिया है कि वह संवैधानिक और कानूनी ढांचे के भीतर राज्य में एनआरसी प्रक्रिया शुरू करने के लिए तैयार है। श्री कोंथौजम ने सभा को यह भी बताया कि देश में जनसंख्या में होने वाले बदलावों का अध्ययन करने के लिए केन्द्र सरकार के गृह मंत्रालय के तहत एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया गया है।

यह सेमिनार प्रदेश सरकार के गृह विभाग और मणिपुर राज्य जनसंख्या आयोग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है।

उद्घाटन सत्र में कमिश्नर (गृह) एन. अशोक कुमार; राज्य जनसंख्या कमिश्नर एम. मणिमोहन मैतेई, मणिपुर राज्य जनसंख्या आयोग के सचिव डॉ. एम. वेटो सिंह , नागरिक समाज संगठनों के नेता, सामुदायिक नेता, महिला नेता, बुद्धिजीवी, शिक्षाविद और गृह विभाग के अधिकारी आदि शामिल हुए।

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