भोपाल , अप्रैल 29 -- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आने वाले दिनों में प्रदेश के विभिन्न उपार्जन केन्द्रों का आकस्मिक निरीक्षण करेंगे। इस दौरान वे किसानों से सीधे संवाद कर गेहूँ उपार्जन की व्यवस्थाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लेंगे।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री किसी भी समय और किसी भी स्थान पर हेलीकॉप्टर से उतरकर उपार्जन केन्द्रों का निरीक्षण कर सकते हैं। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन द्वारा निर्धारित सुविधाएं किसानों तक सही तरीके से पहुंच रही हैं या नहीं।

राज्य सरकार द्वारा उपार्जन केन्द्रों पर किसानों की सुविधा के लिए पेयजल, छायादार बैठने की व्यवस्था और अन्य जन सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए उन्हें जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर गेहूँ विक्रय की सुविधा दी गई है।

तौल प्रक्रिया को तेज और सुगम बनाने के लिए प्रत्येक केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर छह कर दी गई है, साथ ही आवश्यकता अनुसार इसे और बढ़ाने का अधिकार जिलों को दिया गया है। गेहूँ की गुणवत्ता के एफएक्यू मापदंडों में भी शिथिलता प्रदान करते हुए चमक विहीन गेहूँ की सीमा 50 प्रतिशत, सूकड़े दाने 10 प्रतिशत तथा क्षतिग्रस्त दाने 6 प्रतिशत तक स्वीकार्य किए गए हैं।

उपार्जन केन्द्रों पर बारदाने, हम्माल, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, नेट कनेक्शन, कूपन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण सहित साफ-सफाई के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही प्रति केन्द्र स्लॉट बुकिंग क्षमता 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 2250 क्विंटल कर दी गई है, जिसे आवश्यकता अनुसार 3000 क्विंटल तक बढ़ाया जा सकता है।

राज्य में किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तथा 40 रुपये बोनस सहित कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ खरीदी की जा रही है। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक शनिवार को भी स्लॉट बुकिंग और उपार्जन का कार्य जारी रहेगा। सरकार द्वारा किए जा रहे इन प्रयासों की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के लिए उपार्जन केन्द्रों पर जनसंपर्क विभाग के पोस्टर और बैनर भी लगाए गए हैं।

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